रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बार फिर दिशानिर्देशों का सही से अनुपालन न करने वाले बैंकों के खिलाफ सख्ती दिखाई है। चार सहकारी बैंकों पर पेनल्टी लगाई है। इस सूची में मध्यप्रदेश का एक बैंक भी शामिल है। यह कदम बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के विभिन्न प्रावधानों के तहत उठाया गया है। इस कार्रवाई की जानकारी बैंक ने 27 जुलाई को अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in पर प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी है।
मध्य प्रदेश के शाजापुर में स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित पर एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने डिपॉजिटर्स एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में निर्धारित समय सीमा के भीतर अपात्र अनक्लेम्ड अमाउंट को ट्रांसफर करने में असफल रहा।
महाराष्ट्र के दो बैंकों पर लगा जुर्माना
महाराष्ट्र में स्थित सांगली डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस बैंक में निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। वहीं रायगढ़ डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 10.10 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। इस बैंक में भी निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए। इसके अलावा सभी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों को उधारकर्ताओं की क्रेडिट इन्फॉर्मेशन जानकारी देने में भी नहीं दे पाया।
कर्नाटक के इस बैंक पर लगी पेनल्टी
कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित दि सिटीजंस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने आरबीआई द्वारा जारी “आय की पहचान, संपत्ति का वर्गीकरण, प्रावधान और अन्य संबंधित मामले- यूसीबी” पर जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन नहीं किया। कुछ लोन खातों को नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (NPA) के तौर पर वर्गीकृत करने में विफल रहा।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का बैंकों और ग्राहकों के बीच हो रहे लेनदेन या एग्रीमेंट पर नहीं पड़ेगा। 31 मार्च 2025 तक नाबार्ड त आरबीआई द्वारा किए गए एक निरीक्षण के दौरान दिशा निर्देशों के अनुपालन में खामियों का पता चला था। जिसके बाद बैंकोंको कारण बताओं नोटिस जारी किया गया। नोटिस पर मिली प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद जब आरोप सही साबित हुए, तब पेनल्टी लगाने का फैसला लिया है।






