एक बार फिर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। इन नॉन फाइनेंस कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया है। इस सूची में फाइव स्टार बिजनेस फाइनेंस लिमिटेड, Can फिन होम्स फाइनेंस लिमिटेड और पहल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड शामिल है। इस बात की जानकारी आरबीआई अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in पर दी है। निरीक्षण के दौरान दिशा निर्देशों के अनुपालन में खामियों का पता चला था।
कंपनियों के वित्त स्थिति को चेक करने के लिए 31 मार्च 2025 तक एक संवैधानिक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान आरबीआई को पता चला कि कंपनियां दिशा निर्देशों का सही से अनुपालन नहीं कर रही हैं। जांच की रिपोर्ट के आधार पर तीनों कंपनियों को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया और स्पष्टीकरण मांगा गया। इस पर मिले जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक प्रस्तुतियों को देखते हुए सभी आरोप सही साबित होने पर आरबीआई पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया है।
आरबीआई ने क्यों उठाया यह कदम?
- पहल फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने केवाईसी से संबंधित दिशा निर्देशों का उल्लंघन किया है। कंपनी संदिग्ध लेनदेन की पहचान और रिपोर्टिंग के लिए एक मजबूत सॉफ्टवेयर लागू करने में विफल रही।
- फाइव स्टार बिजनेस फाइनेंस लिमिटेड पर 6.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस कंपनी ने केवाईसी और “फेयर प्रैक्टिस कोड” पर जारी आरबीआई के दिशा निर्देशों का उल्लंघन नहीं किया है। कंपनी संदिग्ध लेनदेन की प्रभावी पहचान और रिपोर्टिंग के लिए एक मजबूत सॉफ्टवेयर लागू नहीं कर पाई। इसके अलावा आवेदन फार्म और मंजूरी पत्रों में जोखिम के स्तर को तय करने के तरीके और अलग-अलग श्रेणी के उधारकर्ता में अलग-अलग ब्याज वसूलने के कारण का खुलासा भी नहीं कर पाई।
- कैन फिन होम्स लिमिटेड पर 2.70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस कंपनी ने उधारकर्ता से वसूल की गई लोन की किस्तों में ब्याज और मूलधन के बीच अंतर को स्पष्ट रूप में नहीं बताया।
ग्राहकों पर असर नहीं पड़ेगा
आरबीआई देशभर के सभी एनबीएफसी को रेगुलेट करने का काम करता है। नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करता है। तीनों कंपनियों पर विनियामक खामियों को देखते हुए जुर्माना लगाया गया है। इसका असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। इस बात की पुष्टि खुद सेंट्रल बैंक ने की है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि यह कार्रवाई विनियामक कमियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्राहक और कंपनी के बीच हो रहे किसी भी ट्रांजेक्शन या एग्रीमेंट की वैधता पर प्रभाव डालना नहीं है।






