जून में भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की कार्रवाई जारी है। उत्तर प्रदेश के महारजगंज में स्थित नगर सहकारी बैंक लिमिटेड पर 14.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने “आय की पहचान, “परिसंपत्ति वर्गीकरण” समेत आरबीआई द्वारा कई दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया। फैसला सेंट्रल बैंक ने आरबीआई एक्ट 1949 और क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी एक्ट 2005 के विभिन्न प्रवधानों के तहत लिया है। कार्रवाई की जानकारी आरबीआई ने 4 जून को अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in पर दी है।
मार्च 2025 तक बैंक के वित्तीय स्थिति को जानने के लिए आरबीआई ने संवैधानिक निरीक्षण किया था। इस दौरान दिशा निर्देशों के अनुपालन में खुलासा हुआ। जांच की रिपोर्ट के आधार पर बैंक को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जिस पर मिली प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक स्पष्टीकरण पर विचार करने के बाद 26 मई को आरबीआई ने पेनल्टी का आदेश जारी किया।
बैंक ने किया नियमों का उल्लंघन?
बैंक ने कुछ उधारकर्ताओं की ऋण सुविधाओं को गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) के रूप में वर्गीकृत नहीं किया। कुछ एनपीए को सही ढंग से वर्गीकृत पहचान लगातार आधार पर नहीं कर पाया। व्यक्तिगत और समग्र स्तर पर सुरक्षित एडवांस पर निर्धारित विनियामक सीमाओं का उल्लंघन किया। अपने उधारकर्ताओं की जानकारी क्रेडिट सूचना कंपनियों को नहीं दे पाया। इसके अलावा कुछ लोन स्वीकृतियों में कमियों से बचने के लिए उचित सावधानियां भी नहीं बरती। सभी आरोप सही साबित होने पर ही जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया।
ग्राहकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
इस एक्शन का असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। उन्हें सभी सेवाओं का लाभ पहले की तरह ही मिलता रहेगा। सेंट्रल बैंक ने कहा “यह कार्रवाई अनुपालन में पाई गई खामियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ दिए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर कोई निर्णय देना नहीं है। न ही भविष्य में होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की अन्य कार्रवाई पर इसका असर पड़ेगा”
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