रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने बेसल III मार्केट रिस्क के लिए कम से कम कैपिटल की जरूरतओ को लेकर संशोधित गाइडलाइंस जारी किए हैं। ड्राफ्ट निर्देशों की तुलना में फाइनल निर्देशों में पांच बड़े बदलाव शामिल किए गए हैं। इस बात की जानकारी आरबीआई ने सोमवार को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर दी है। इसका उद्देश्य मार्केट रिस्क गाइडलाइंस बेसल III फ्रेमवर्क के साथ जोड़ना है, जो सेंट्रल बैंक द्वारा बेसिस स्टैंडर्ड को अपनाने का हिस्सा है।
नोटिफिकेशन के मुताबिक नए निर्देश 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाएंगे। ताकि बैंकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। यह बदलाव देशभर के सभी कमर्शियल बैंकों पर लागू होंगे। हालांकि क्षेत्रीय बैंक, भुगतान बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंकों पर आरबीआई ने ये निर्देश लागू नहीं होंगे।
17 फरवरी 2023 को बेसल III के तहत मार्केट रिस्क के लिए मिनिमम कैपिटल रिक्वायरमेंट को लेकर ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की गई थी। इस पर इस पर मिली राय की जांच के आधार पर जरूरी बदलाव के साथ फाइनल निर्देश जारी किए गए हैं।
अब नहीं चलेगी बैंकों की मनमानी
आरबीआई द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक कोई भी बैंक नियामक मध्यस्थता के लिए यानी कम पूंजी जरूरत को प्राप्त करने की सीधे ट्रेडिंग बुक और बैंकिंग बुक के बीच उपकरणों का पुनर्वर्गीकरण नहीं कर सकते। बैंक ट्रेडिंग बुक से बैंकिंग बुक में किए गए किसी भी इंटरनल रिस्क ट्रांसफर को रेगुलेटरी कैपिटल की जरूरत तय करते समय ध्यान में नहीं रखेंगे।
रिस्क वेटेज एसेट की गणना के लिए SSA जरूरी
नई गाइडलाइंस के तहत अब बैंकों को बाजार जोखिम के लिए रिस्क वेटेज एसेट की कैलकुलेशन में सरल मनीकृत पद्धति (SSA) अपनानी होगी। जोखिम भारित परिसंपत्तियों का निर्धारण नए ढांचे के तहत परिकलित पूंजी आवश्यकताओं को 12.5 के मल्टीपल से किया जाएगा। आरबीआई ने कहा कि हितधारकों की राय के आधार पर संशोधन में ट्रेडिंग बुक का दायरा शामिल किया गया है। ट्रेडिंग बुक की परिभाषा से जुड़े निर्देश फाइनल निर्देशों से हटा दिए गए हैं। ट्रेडिंग बुक में रखे गए डेट म्युचुअल फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के कैपिटल से जुड़े नियमों को संशोधित किया गया है।






