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यूजर्स के लिए फ्री रहेगा UPI पेमेंट, सरकार ने दिया स्पष्टीकरण, जानें मर्चेंट्स के लिए क्या बदलेगा?

यूपीआई पेमेंट को लेकर वित्त मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया है। यूजर्स पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। MDR लागू होने से मर्चेंट्स को मामूली शुल्क देना पड़ेगा।  
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वित्त मंत्रालय ने 8 अगस्त को संशोधित पेमेंट एंड सेटेलमेंट एक्ट को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ने UPI यूजर्स को लेनदेन के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा। सभी पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजेक्शन (P2P) पूरी तरीके से मुफ़्त होंगे। इसके अलावा ज्यादातर लेनदेन मर्चेंट्स के लिए भी मुफ़्त रहेंगे।

मंत्रालय ने कहा कि, ” PSS एक्ट को लेकर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे आम यूजर्स पर चार्ज लगाने की कोशिश के तौर पर गलत समझ रहे हैं। असल में यह संशोधन एक ऐसा प्रावधान है, जिसे यूपीआई के लंबे समय तक चलने वाली क्षमता, तकनीकी तरक्की होना और खतरों से निपटने की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।”

व्यापारियों से लिए क्या व्यवस्था होगी?

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई पर ज्यादातर ट्रांजेक्शन मर्चेंट के लिए मुक्त ही रहेंगे। अगर एमडीआर लागू किया जाता है, तो वह सिर्फ एक तय सीमा के आधार पर होगा, न कि किसी पर एक साथ लागू किया जाएगा। चार्ज केवल कुछ खास मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर ही लागू होंगे, जो मामूली दर पर लगेंगे। शुल्क डेबिट या क्रेडिट कार्ड के MDR से भी काफी कम होगा।

पीएसएस एक्ट क्यों जरूरी?

मंत्रालय ने बताया कि नए संशोधित बिल का उद्देश्य यूपीआई ग्रोथ, मार्केट का विस्तार और सेल्फ सस्टेनेबिलिटी है। बढ़ती संख्या को देखते हुए इस सिस्टम में साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी से बचाव और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले बड़े और लगातार अपग्रेड की जरूरत है। मार्केट के विस्तार के लिए सेल्फ सस्टेनिंग मॉडल की जरूरत है। ग्रोथ के दौर में सिर्फ सब्सिडी पर निर्भर रहना सही नहीं है, यह एक संतुलित स्ट्रक्चर जरूरी है, ताकि यूपीआई को मजबूत किया जा सके।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स दावा कर रहे थे कि बाहरी दबाव की वजह से यूपीआई में बदलाव हो रहे हैं। जिसका खंडन वित्त मंत्रालय ने किया है। ऐसी खबरों को गलत और भ्रामक बताया है। केंद्र ने कहा, “यदि बाहरी दबाव होता है तो 2016 में यूपीआई की शुरुआत नहीं होती न ही जनवरी 2020 से इसे मर्चेंट और आम यूजर्स मुफ्त किया है।

Manisha Kumari Pandey
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