भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज यानी 10 जून 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। शुद्ध सोने की कीमतों में 4,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा की कमी आई है जिसके बाद देश के अधिकांश राज्यों और प्रमुख शहरों में 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत 1,48,860 से 1,49,888 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच चल रही है। गहने बनाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत भी टूटकर 1,36,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है।
चांदी करीब 9000 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूटी, जिसके बाद बाजार में चांदी की कीमत घटकर 2,34,800 रुपये से 2,36,700 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में आ गई है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में भी उतार चढ़ाव देखने को मिला है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोना लगभग $4,202 से $4,214 प्रति औंस के बीच कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी लगभग $63.85 से $65.29 प्रति औंस के स्तर पर चल रही है
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मजबूत होकर 100 के करीब पहुंच रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव वैश्विक बाजार में 92.24 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड का भाव भी 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। फिलहाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 95.18 रुपए से 95.50 रुपए प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है।
जब भी डॉलर मजबूत होता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी पर दबाव बनता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों की मुद्राओं (जैसे भारतीय रुपया) के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है।कच्चे तेल के महंगे होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का भी खतरा बना हुआ है।
अमेरिकी आर्थिक (रोजगार) आंकड़े मजबूत होने के बाद यह आशंका भी बढ़ गई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व दिसंबर तक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है या उन्हें लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोने की मांग घट जाती है। यही कारण है कि भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई की चिंता के बीच बाजार का पूरा ध्यान अब ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़ों पर टिक गया है। वहीं निवेशकों का रुझान डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की तरफ बढ़ा है, जिससे सोने की मांग कमजोर हुई है।
बाजार विश्लेषकों की मानें तो जब तक वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और डॉलर की स्थिति साफ नहीं होती, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है, ऐसे में फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर आने वाले बयानों और महंगाई के आंकड़ों पर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं। निवेशक भारी निवेश करने से बच रहे हैं और वेट एंड वॉच (रुको और देखो) की नीति अपना रहे हैं।
ध्यान रहे कि ऊपर दिए गए सोने-चांदी के भावों में राज्यों के जीएसटी (GST) और ज्वैलरी के मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं, इसलिए राज्यवार खुदरा दुकान पर अंतिम रेट अलग हो सकते हैं। स्थानीय टैक्स, परिवहन लागत और ज्वेलर्स के मेकिंग चार्ज के कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है इसे निवेश की सलाह ना मानें। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बाजार विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।






