रायपुर. गुरुवार को विष्णु देव साय सरकार की कैबिनेट ने उन फैसलों पर मुहर लगा दी, जिनका इंतजार लंबे समय से हो रहा था। बैठक में एक तरफ जहां धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून के मसौदे को मंजूरी दी गई, वहीं दूसरी तरफ भर्ती परीक्षाओं में सेंधमारी करने वाले नकल माफिया पर शिकंजा कसने का रास्ता भी साफ कर दिया गया। इन फैसलों से साफ है कि सरकार अपने एजेंडे पर तेजी से काम कर रही है।
धर्मांतरण पर अब सख्त पहरा
कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ को मंजूरी देना रहा। सरकार का कहना है कि यह कानून बल, लालच, धोखे या किसी भी तरह के गलत तरीके से होने वाले धर्मांतरण को रोकेगा। अगर यह विधेयक विधानसभा से पास हो जाता है, तो प्रदेश में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन की प्रक्रिया पहले जैसी आसान नहीं रहेगी। इसे लेकर अब नए और कड़े नियम लागू होंगे।
नकल माफिया पर लगेगी नकेल, बनेगा नया बोर्ड
युवाओं से जुड़े दो बड़े फैसले भी हुए। कैबिनेट ने ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल विधेयक, 2026’ को हरी झंडी दे दी है। यानी अब राज्य में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों के लिए एक अलग चयन मंडल बनेगा, जो परीक्षाएं आयोजित करेगा। इसके साथ ही परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने और नकल रोकने के लिए ‘लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक 2026’ का प्रारूप भी मंजूर कर लिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि अब पेपर लीक करने वालों या नकल करने वालों की खैर नहीं होगी।
आम लोगों को राहत, नेताओं पर मेहरबानी?
एक और अहम फैसले में सरकार ने प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर लगने वाला अतिरिक्त उपकर खत्म कर दिया है। यह उपकर पिछली सरकार ने ‘राजीव गांधी मितान क्लब योजना’ के लिए लगाया था। क्योंकि अब यह योजना बंद हो चुकी है, इसलिए इस टैक्स को भी हटा दिया गया है, जिससे जमीन-मकान खरीदने वालों को थोड़ी राहत मिलेगी।
वहीं, कैबिनेट ने राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े 13 केस वापस लेने की सिफारिश को भी मंजूरी दे दी है। ये मामले कोर्ट से वापस लिए जाएंगे।
इसके अलावा, राजनांदगांव में एक क्रिकेट अकादमी बनाने के लिए जिला क्रिकेट एसोसिएशन को 5 एकड़ जमीन देने का भी फैसला हुआ है। साथ ही सोलर एनर्जी और बायोगैस संयंत्रों के लिए मिलने वाले अनुदान की दरें भी तय की गई हैं।






