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छत्तीसगढ़ में बिना मान्यता स्कूलों के एडमिशन विज्ञापन पर हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव को 24 मार्च 2026 तक देना होगा जवाब

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिना मान्यता वाले स्कूलों द्वारा सत्र 2026-27 के लिए एडमिशन विज्ञापन देने पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इसे अपने पूर्व आदेशों का उल्लंघन मानते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को होगी।
छत्तीसगढ़ में बिना मान्यता स्कूलों के एडमिशन विज्ञापन पर हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव को 24 मार्च 2026 तक देना होगा जवाब

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिना मान्यता के संचालित हो रहे निजी स्कूलों द्वारा धड़ल्ले से एडमिशन विज्ञापन जारी करने के मामले में उच्च न्यायालय ने गंभीर चिंता जताई है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इसे अदालत के आदेशों की अवमानना माना है। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस मामले में व्यक्तिगत हलफनामा (Personal Affidavit) दाखिल करने का आदेश दिया है।

यह पूरा मामला जनहित याचिका (WPPIL No. 22/2016) में इंटरवीनर विकास तिवारी द्वारा उठाए गए मुद्दों से संबंधित है। सुनवाई के दौरान तिवारी ने अदालत के समक्ष एक पत्रिका में प्रकाशित विज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें सत्र 2026-27 के लिए कई निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी गई थी।

इन स्कूलों को जारी हुआ नोटिस

विज्ञापन में जिन स्कूलों का जिक्र था, उनमें कृष्णा पब्लिक स्कूल, तुलसी (रायपुर) का नाम प्रमुखता से शामिल है। इसके अलावा, तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी (मोवा) और कृष्णा किड्स एकेडमी के चार अन्य ब्रांचों— शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर- का भी उल्लेख था। याचिका में दावा किया गया कि ये स्कूल बिना आवश्यक मान्यता के संचालित हो रहे हैं और फिर भी छात्रों को प्रवेश दे रहे हैं।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कृष्णा पब्लिक स्कूल, तुलसी (रायपुर) को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी कोर्ट ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान इंटरवीनर ने कोर्ट को यह भी बताया कि उनकी शिकायतों पर लोक शिक्षण संचालनालय ने 5 फरवरी 2026 को ही दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को पत्र लिखकर एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। लेकिन, इस निर्देश के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

“बिना मान्यता के स्कूलों द्वारा एडमिशन का विज्ञापन देना अदालत के वैध आदेशों की अवमानना है।”- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय

इस पर डिवीजन बेंच ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए आदेश का पालन सुनिश्चित करने और अगली सुनवाई तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

24 मार्च को अगली सुनवाई

उच्च न्यायालय ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे इस पूरे मामले पर अपना जवाब एक व्यक्तिगत हलफनामे के जरिए दाखिल करें। अदालत यह जानना चाहती है कि बिना मान्यता वाले स्कूलों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है और वे कैसे विज्ञापन जारी कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 मार्च 2026 की तारीख तय की गई है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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