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रेत घोटाले का कथित ऑडियो वायरल होने पर बवाल, पामगढ़ कांग्रेस विधायक पर लगे गंभीर आरोप; पूरा मामला

Written by:Saurabh Singh
Published:
इस विवाद ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। विधायक ने पार्टी स्तर पर शिकायत करने और अपने खिलाफ साजिश रचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
रेत घोटाले का कथित ऑडियो वायरल होने पर बवाल, पामगढ़ कांग्रेस विधायक पर लगे गंभीर आरोप; पूरा मामला

जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ से कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंश का एक कथित ऑडियो वायरल होने से छत्तीसगढ़ की राजनीति में हड़कंप मच गया है। ऑडियो में विधायक द्वारा अवैध रेत उत्खनन के लिए कलेक्टर, एसडीएम और अन्य लोगों को लाखों रुपये देने की बातचीत का दावा किया गया है। इसमें प्रति माह कलेक्टर को 3 लाख, एसडीएम को 2 लाख, स्वयं के लिए 5 लाख और एक राघवेन्द्र नामक व्यक्ति के लिए 1 लाख रुपये की मांग का जिक्र है। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने सियासी हलकों में तूल पकड़ लिया है।

सूत्रों के मुताबिक, यह ऑडियो विधायक और रेत कारोबार से जुड़े रोशन नामक व्यक्ति के बीच हुई बातचीत का है। इसमें अवैध रेत उत्खनन के दौरान पकड़ी गई गाड़ी छुड़वाने और चालान रोकने के लिए लेन-देन की चर्चा भी सुनाई देती है। जांजगीर-चांपा में रेत माफियाओं का कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा है और इसे कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप भी लगते रहे हैं। इस ऑडियो के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

ऑडियो को बताया फर्जी

विधायक शेषराज हरबंश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन ऑडियो को फर्जी बताते हुए इसे बदनाम करने की साजिश करार दिया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और भाजपा के कुछ पदाधिकारी मिलकर एआई तकनीक से ऑडियो को एडिट कर वायरल कर रहे हैं। विधायक ने एक ऑडियो को पुराना और सही माना, जिसमें उन्होंने चालान और गाड़ी छुड़वाने की बात कही थी, लेकिन बाकी ऑडियो को फर्जी बताया। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने और पुलिस से जांच की मांग की है।

राजनीति में आया नया मोड़

इस विवाद ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। विधायक ने पार्टी स्तर पर शिकायत करने और अपने खिलाफ साजिश रचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने कांग्रेस पदाधिकारी राजेश भारद्वाज पर भी सरकारी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का आरोप लगाया। इस मामले की जांच और ऑडियो की प्रामाणिकता की पड़ताल के लिए पुलिस और प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है, जबकि जनता के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।