छत्तीसगढ़ में गर्मियों की छुट्टियों के बाद अब 16 जून से स्कूल खुलने जा रहे हैं। इसके लिए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। वहीं सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षा विभाग ने एक और आदेश निकालकर नई व्यवस्था लागू कर दी है, जिसको लेकर अब प्रदेश की राजनीति में बवाल मच गया है।
दरअसल, 12 जून को स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करते हुए प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों गायत्री मंत्र और सरस्वती वंदना को अनिवार्य कर दिया है। इतना ही नहीं आदेश में अन्य चीजों का भी जिक्र किया गया है। जिसको लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
RSS का एजेंडा थोपने की कोशिश: कांग्रेस
इस मामले में कांग्रेस ने सीधे आरएसएस और भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार स्कूलों में नए नियम निकालकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एजेंडा थोपने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने कहा, स्कूल किसी एक विचारधारा या धर्म विशेष के नहीं होते, बल्कि वहां विभिन्न धर्मों, समुदायों और पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। इसलिए शिक्षा संस्थानों को सभी के लिए समान और समावेशी बनाए रखा जाना चाहिए।
कांग्रेस के बयान पर भाजपा का पलटवार
एक ओर जहां स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में लागू की गई नई व्यवस्था पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है तो वहीं भाजपा ने भी कांग्रेस के बयानों पर पलटवार कर दिया है। भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि जब-जब सनातन की बात आती है, कांग्रेस नेताओं को परेशानी होने लगती है। गायत्री मंत्र में विश्व कल्याण का संदेश है, फिर भी कांग्रेस को इससे आपत्ति है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने कौन सी नई व्यवस्था लागू की?
स्कूल शिक्षा विभाग ने नए शिक्षा सत्र 2026-27 से प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों के लिए नई प्रार्थना व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, सभी सरकारी स्कूलों में प्रतिदिन नियमित रूप से प्रार्थना सभा आयोजित करना अनिवार्य होगा। इसके तहत स्कूलों में दिन में तीन बार प्रार्थना और मंत्र-पाठ कराया जाएगा।
निर्देशों के मुताबिक, सुबह विद्यालय प्रारंभ होने पर सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र सहित कुल छह प्रार्थनाएं कराई जाएंगी। इसके अलावा महापुरुषों की जीवनी का वाचन, राज्यगीत और शांति मंत्र का पाठ भी होगा। दोपहर के भोजन अवकाश के समय विद्यार्थियों से भोजन मंत्र का उच्चारण कराया जाएगा, जबकि स्कूल की छुट्टी के समय गायत्री मंत्र का पाठ कराया जाएगा।
विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि नए सत्र की शुरुआत के साथ सभी स्कूलों में प्रवेश उत्सव आयोजित किया जाए। इस दौरान विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया जाएगा और उन्हें विद्यालय से जोड़ने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन गतिविधियों से विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा, साथ ही विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण को भी बढ़ावा मिलेगा।






