रायपुर: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या को लेकर कांग्रेस पर बड़ा वैचारिक हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि नक्सलवाद को केवल विकास की कमी या कानून-व्यवस्था की चुनौती के रूप में देखना एक बड़ी भूल है। उनके मुताबिक, यह एक ऐसी विचारधारा है जिसने गरीब आदिवासी युवाओं को गुमराह कर उनके भविष्य को बर्बाद किया।
छत्तीसगढ़ की 25 वर्षों की विकास यात्रा पर बात करते हुए शाह ने इस मुद्दे पर किसी भी मंच पर बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर यह समस्या सिर्फ विकास से जुड़ी होती तो इसे ‘माओवाद’ का नाम क्यों दिया जाता।
“मैं किसी के भी साथ प्रमाणों के साथ डिबेट कर सकता हूं कि यह समस्या सिर्फ विकास या कानून-व्यवस्था की नहीं है। यह एक ऐसी विचारधारा है, जिसने गरीब आदिवासी युवाओं और बच्चों के हाथों में हथियार थमा दिए और उनके भविष्य को बर्बाद किया।”- अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माओवाद के फैलने से पहले बस्तर क्षेत्र के विकास के आंकड़े उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों की तुलना में कहीं बेहतर थे, जो इस तर्क को खारिज करता है कि यह केवल पिछड़ेपन की उपज है।
डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल की सराहना
अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के 15 साल के शासन की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह ने राज्य को ‘बीमारू’ की श्रेणी से बाहर निकालकर विकास की पटरी पर दौड़ाया।
शाह ने कहा, “डॉ. रमन सिंह ने विकास के हर आयाम में राज्य को आगे बढ़ाया और माओवादी विचारधारा के खिलाफ डटकर संघर्ष किया। उन्होंने सीमित संसाधनों और केंद्र में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद नक्सलवाद पर काफी हद तक लगाम लगाई।”
आंकड़ों में छत्तीसगढ़ की विकास गाथा
राज्य की आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए गृहमंत्री ने कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि साल 2000 की तुलना में 2025 तक छत्तीसगढ़ के वार्षिक बजट में 30 गुना की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने दावा किया कि देश के किसी भी राज्य में इस स्तर की वृद्धि देखने को नहीं मिली है।
इसके अलावा, राज्य के सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVP) में भी 25 गुना की वृद्धि हुई है, जो राज्य की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।
कांग्रेस के शुरुआती शासन पर सवाल
अमित शाह ने राज्य गठन के बाद शुरुआती कांग्रेस सरकार के दौर की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि उन वर्षों में छत्तीसगढ़ ने केवल अत्याचार, दंगे और आंदोलन देखे। उन्होंने यह भी कहा कि जब नक्सलवाद 12 राज्यों में एक गंभीर समस्या के रूप में फैला हुआ था, तब केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, जिसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ा।





