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कार्यालय का गेट बंद, ‘नो पंच-नो लंच’, अब देर करने वालों की खैर नहीं, ऑफिस में कलेक्टर का एक्शन मोड ऑन

Written by:Saurabh Singh
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कलेक्टर भगवान दास उइके ने बताया कि लंबे समय से उन्हें कर्मचारियों और अधिकारियों के देर से कार्यालय पहुंचने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके लिए उन्होंने कई बार मौखिक चेतावनी दी और नोटिस भी जारी किए, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।
कार्यालय का गेट बंद, ‘नो पंच-नो लंच’, अब देर करने वालों की खैर नहीं, ऑफिस में कलेक्टर का एक्शन मोड ऑन

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सोमवार को एक अनोखी घटना सामने आई, जब कलेक्टर भगवान दास उइके ने सुबह 10 बजे संयुक्त जिला कार्यालय का गेट बंद करवा दिया। इससे कई अधिकारी और कर्मचारी, जो समय पर नहीं पहुंचे, बाहर ही रह गए। कलेक्टर का यह कदम कार्यालय में समयबद्धता लाने के लिए उठाया गया, क्योंकि उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कर्मचारी देर से आते हैं, जिससे जनता को परेशानी होती है। इस पहल ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा है।

कलेक्टर भगवान दास उइके ने बताया कि लंबे समय से उन्हें कर्मचारियों और अधिकारियों के देर से कार्यालय पहुंचने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके लिए उन्होंने कई बार मौखिक चेतावनी दी और नोटिस भी जारी किए, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। पहले उन्होंने अधिकारियों को गरियाबंद में ही रहने का आदेश दिया था, फिर भी समय पर उपस्थिति में कमी देखी गई। इस स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने सख्ती बरतते हुए गेट बंद करने का फैसला लिया, जिससे बाहर रह गए कर्मचारी हैरान रह गए और गेट के बाहर चर्चा करते दिखे।

अब कार्यालय का काम समय पर शुरू

इस कदम की स्थानीय लोगों ने खूब सराहना की है। उनका कहना है कि अक्सर कार्यालय देर से खुलते हैं या कर्मचारी समय पर नहीं आते, जिससे आम लोगों को अपने काम के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। कलेक्टर की इस पहल से अब कार्यालय का काम समय पर शुरू होगा, जिसका सीधा लाभ जनता को मिलेगा। लोगों ने इसे प्रशासन की जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

नियम आगे भी सख्ती से लागू

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह नियम आगे भी सख्ती से लागू रहेगा और समय पर न आने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कर्मचारी देर से आते हैं, जिससे कार्यालय का काम प्रभावित होता है। कई बार समझाने और नोटिस देने के बावजूद स्थिति नहीं सुधरी, इसलिए यह कदम उठाना पड़ा।” यह पहल न केवल कार्यालय में अनुशासन लाएगी, बल्कि जनता के प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी को भी दर्शाती है।

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