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नक्सली आतंक का अंत, खूंखार कमांडर हिड़मा पत्नी सहित ढेर, सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया

Written by:Atul Saxena
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बता दें आंध्रप्रदेश के मारेडुमिली क्षेत्र में सुबह सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच जोरदार मुठभेड़ हुई। जानकारी के अनुसार सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच हुई इस फायरिंग में दोनों ओर से कई राउंड गोलियां चलीं।
नक्सली आतंक का अंत, खूंखार कमांडर हिड़मा पत्नी सहित ढेर, सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया

केंद्र की मोदी सरकार ने नक्सलवाद/माओवाद के खात्मे के लिए अभियान चला रखा है, सुरक्षा बल नक्सलियों के मंसूबों को भांपकर उन्हें ठिकाने लगा रहे हैं, इसी क्रम में आज सुरक्षा बालों को एक बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार की सुबह सुरक्षाबलों ने छत्तीसगढ़ के सुकमा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर मुठभेड़ में 6 माओवादियों को मार गिराया है। इसमें कुख्यात माओवादी हिड़मा भी शामिल है।

जानकारी के अनुसार मुठभेड़ में 50 लाख रुपये के इनामी खूंखार नक्सली हिड़मा, उसकी पत्नी राजे और 25 लाख रुपये के इनामी माओवादी शंकर के मारे जाने की भी खबर है। यह इनकाउंटर सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी सफलता के साथ साथ माओवाद के ताबूत में एक और कील मानी जा रही है। इस ऑपरेशन को आंध्र-प्रदेश की ग्रे-हांउड टीम ने अंजाम दिया है।

लंबे समय से सुरक्षा बलों के टारगेट पर था

गौरतलब है कि टॉप के नक्सली नेताओं के मारे जाने और पिछले दिनों कुछ बड़े नक्सली कमांडरों के आत्मसमर्पण के बाद से बस्तर में हिड़मा की गिनती टॉप कमांडर के रूप में होने लगी थी, हिड़मा माओवादी संगठन की बटालियन नंबर-1 का प्रभारी और केंद्रीय समिति का सदस्य था। वह लंबे समय से सुरक्षा बलों के टारगेट पर था।

झीरम घाटी हमले के बाद आया था चर्चाओं में 

हिड़मा का नाम पहली बार झीरम घाटी हमले के बाद चर्चाओं में आया था। माओवादी संगठन ने पिछले वर्ष उसे केंद्रीय समिति का सदस्य बनाया गया, हालांकि पद की हिसाब से वो बहुत नीचे है उसके ऊपर कई कमांडर है लेकिन सक्रियता और प्रभाव के चलते वो संगठन का सबसे ताकतवर चेहरा बन गया था।

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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