डबरा में एक दुल्हन की शादी की खुशियाँ उस वक्त फीकी पड़ गईं, जब ससुराल जाने के बजाय उसे सीधे थाने का रास्ता देखना पड़ा। लाल जोड़े में सजी, हाथों में चूड़ा और मेहंदी लगाए वह दुल्हन, जिसकी आँखों में ससुराल के सपने थे, अचानक खुद को पुलिस स्टेशन के गलियारों में पाकर हैरान थी। यह कोई आपराधिक मामला नहीं था, न ही कोई दुर्घटना, बल्कि एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में हुए वादे का टूटना था जिसने उसे इस अप्रत्याशित मोड़ पर ला खड़ा किया।
दरअसल, यह पूरा मामला डबरा सिटी थाने में शुक्रवार देर रात सामने आया, जिसने न केवल पुलिसकर्मियों को चौंका दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। एक नवविवाहित दुल्हन, जिसके लिए यह दिन जीवन का सबसे सुखद दिन होना चाहिए था, उसने अपनी विदाई की रस्में बीच में ही छोड़कर न्याय की गुहार लगाने का फैसला किया। उसकी नाराजगी का कारण था गृहस्थी का सामान और एक मोटरसाइकिल, जिसका वादा सामूहिक विवाह के आयोजकों ने किया था, लेकिन ऐन वक्त पर वे अपने वादे से मुकर गए।
सामूहिक विवाह में वादाखिलाफी का आरोप
जानकारी के मुताबिक, यह घटना एक सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन से जुड़ी है, जिसका आयोजन रंग महल गार्डन में ईशानी शिक्षा एवं जन कल्याण समिति द्वारा किया गया था। मीट मार्केट क्षेत्र की रहने वाली लवली वाल्मीकि का विवाह इसी सम्मेलन में झांसी निवासी सुनील वाल्मीकि के साथ संपन्न हुआ था। वधु पक्ष का आरोप है कि विवाह से पहले समिति के पास 90 हजार रुपये की राशि जमा कराई गई थी, और इतनी ही राशि वर पक्ष ने भी दी थी। यह रकम इसलिए दी गई थी क्योंकि आयोजकों ने स्पष्ट रूप से दुल्हन को एक मोटरसाइकिल और गृहस्थी का पूरा सामान देने का वादा किया था। दोनों पक्षों ने आयोजकों के इस आश्वासन पर भरोसा किया था कि उनके नए जीवन की शुरुआत सभी आवश्यक वस्तुओं के साथ होगी।
विदाई से पहले वादे का सामान मांगने पर शुरू हुआ विवाद
शादी की सभी रस्में पूरे विधि-विधान से संपन्न हो चुकी थीं। अब वह शुभ घड़ी थी जब दुल्हन को अपने नए जीवन की शुरुआत करने के लिए ससुराल के लिए विदा होना था। लेकिन जैसे ही ससुराल पक्ष ने आयोजकों से वादे के मुताबिक सामान की मांग की, आरोप है कि समिति के लोग कोई संतोषजनक जवाब देने में आनाकानी करने लगे। उन्होंने न केवल सामान देने से इनकार कर दिया, बल्कि इस मामले पर कोई स्पष्टीकरण भी नहीं दिया। यह सुनकर दोनों पक्षों में जबरदस्त नाराजगी फैल गई और विवाद इतना बढ़ गया कि माहौल तनावपूर्ण हो गया। अपनी आँखों में टूटते सपनों और मिले धोखे से आहत, दुल्हन लवली ने एक साहसिक कदम उठाया। उसने अपनी विदाई रोक दी और अपने लाल जोड़े में ही सीधे डबरा सिटी थाने का रुख किया। थाने में लाल जोड़े में सजी दुल्हन को देखकर पुलिसकर्मी भी सकते में आ गए, क्योंकि उन्होंने शायद ही कभी ऐसी स्थिति देखी थी।
पुलिस ने दुल्हन को दिया न्याय का भरोसा
मामले की गंभीरता को देखते हुए, एसडीओपी सौरभ कुमार ने तुरंत दुल्हन और उसके परिजनों की शिकायत सुनी। उन्होंने दुल्हन को न्याय का भरोसा दिलाया और आयोजकों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया। एसडीओपी ने वादा किया कि वे स्वयं आयोजकों से बात कर वादे के अनुसार सामान दिलवाने का पूरा प्रयास करेंगे। पुलिस अधिकारी के इस आश्वासन और समझाइश के बाद, दुल्हन लवली कुछ शांत हुई। उसके चेहरे पर मायूसी की जगह थोड़ी उम्मीद की किरण लौटी और अंततः वह खुशी-खुशी अपने ससुराल के लिए विदा हो गई। इस घटना ने एक बार फिर सामूहिक विवाह सम्मेलनों की पारदर्शिता और उनकी निगरानी की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग अब इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि ऐसे आयोजनों में होने वाली वादाखिलाफी पर लगाम कैसे लगाई जाए ताकि किसी और दुल्हन को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।






