मध्य प्रदेश के दमोह में शनिवार रात बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतरे और हाथों में मोमबत्तियां लेकर शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। यह मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए घंटाघर स्थित गांधी प्रतिमा तक पहुंचा, जहां सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत विद्यार्थियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में शामिल छात्रों ने कहा कि किसी भी परीक्षा का दबाव इतना नहीं होना चाहिए कि कोई छात्र अपनी जिंदगी से हार मानने पर मजबूर हो जाए।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान छात्रों ने दिवंगत विद्यार्थियों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य युवाओं को आगे बढ़ाना है, न कि उन्हें मानसिक दबाव में डालना। विद्यार्थियों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि भविष्य में किसी भी छात्र को ऐसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े और हर युवा कठिन समय में अपने परिवार, दोस्तों और शिक्षकों से खुलकर बात करे। कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए।
NEET पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
नीट परीक्षा से जुड़े विवाद ने पूरे देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज कर दी है। कई शहरों में छात्र संगठनों और अभिभावकों ने निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग उठाई है। दमोह में आयोजित कैंडल मार्च भी इसी भावना का प्रतीक माना गया, जहां छात्रों ने केवल श्रद्धांजलि ही नहीं दी, बल्कि बेहतर परीक्षा व्यवस्था की जरूरत पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों का कहना था कि लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो इसका सबसे बड़ा असर छात्रों के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित एजेंसियों को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद रहे। साथ ही छात्रों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को भी मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि तनाव की स्थिति में उन्हें समय पर सहयोग मिल सके।
दमोह कैंडल मार्च में भावुक माहौल
दरअसल घंटाघर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने आयोजित श्रद्धांजलि सभा में माहौल बेहद भावुक रहा। विद्यार्थियों ने मोमबत्तियां जलाकर दिवंगत छात्रों की स्मृति में मौन रखा और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। कई छात्रों ने कहा कि किसी भी परीक्षा का परिणाम जीवन से बड़ा नहीं होता और कठिन परिस्थितियों में हार मानने के बजाय परिवार, शिक्षकों और मित्रों से संवाद करना जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने समाज से भी अपील की कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं पर अनावश्यक दबाव न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन हर छात्र का जीवन सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
दमोह से दिनेश अग्रवाल की रिपोर्ट






