धार भोजशाला विवाद मामले की सुनवाई के दौरान पिछले दिनों देश की सर्वोच्च अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था देते हुए भोजशाला परिसर के पास मुस्लिम पक्ष को जुमे की नमाज यानि शुक्रवार के दिन दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज पढ़ने के लिए जगह देने के निर्देश दिए थे लेकिन आदेश के बाद आने वाले शुक्रवार को यानि आज 17 जुलाई को नमाज नहीं पढ़ी गई…. जिला प्रशासन के साथ करीब तीन घंटे चली बैठक के बाद जो जगह दी गई उसपर मुस्लिम समाज ने नमाज पढ़ने से इंकार कर दिया।
धार स्थित भोजशाला को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बैंच ने वाग्देवी (माँ सरस्वती) का मंदिर घोषित किया है, भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद पर कई वर्षों तक चली सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 15 मई को फैसला सुनाया जिसमें हाई कोर्ट ने माना कि भोजशाला परिसर राजा भोज से जुड़ी एक ऐतिहासिक धरोहर और हिन्दू मंदिर है कोर्ट ने भोजशाला को वाग्देवी (सरस्वती ) का मंदिर माना और नमाज पढ़ने की अनुमति देने वाले एएसआई के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया था और हिन्दू पक्ष को पूजा का अधिकार दे दिया था, हाई कोर्ट के इस आदेश को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने नमाज पढ़ने के लिए जगह देने के दिए हैं निर्देश
मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मुस्लिम पक्ष की मांग को ख़ारिज कर दिया और दोनों पक्षों को धैर्य रखने के लिया कहा, अदालत ने अंतरिम व्यवस्था देते हुए सरकार को आदेश दिया कि भोजशाला परिसर के पास मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को 1 बजे से 3 बजे तक नमाज पढ़ने के लिए अलग से जगह दी जाए।
प्रशासन ने भोजशाला परिसर से थोड़ी दूर नमाज के लिए दी जगह
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में आज जिला प्रशासन ने सभी पक्षों के साथ बैठक की उनकी राय पूछी, प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के तहत भोजशाला परिसर से थोड़ी दूर एक खुली जगह शुक्रवार के दिन नमाज पढ़ने के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए , प्रशासन ने उस जगह का खसरा नंबर आदि सबके सामने रखा, एडीएम संजीव केशव पांडे ने कहा ग्राम मालीवाड़ा की 40 पीर दरगाह के पास वाली खुली जगह उन्हें अंतिम निर्णय आने तक जुमे की नमाज 1 बजे से 3 बजे तक पढ़ने के लिए उपलब्ध कराई गई है।
मुस्लिम पक्ष भोजशाला के पास नमाज के लिए जगह पर अड़ा
जिला प्रशासन के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने स्वीकार करने से इंकार कर दिया, मुस्लिम पक्ष के याचिकाकर्ता अब्दुल समद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर के पास हमें जुमे की नमाज के लिए जगह देने के निर्देश दिए हैं लेकिन जिला प्रशासन हमारे साथ छल कर रहा है, उसने जो जगह दी है वो 2 किलोमीटर दूर है, हमें ये स्वीकार नहीं है, उन्होंने कहा प्रशासन ने हमें 12:30 से 3 बजे तक बैठाये रखा और 3 बजे हमें अपने आदेश की कॉपी थमा दी जो हमें मंजूर नहीं है हम सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर जायेंगे, क्योंकि जिला प्रशासन के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या गलत की है।
हिन्दू पक्ष 300 भोजशाला परिसर से 300 मीटर दूर नमाज के लिए कह रहा
उधर हिन्दू पक्ष ने प्रशासन के फैसले को सही बताते हुए इसका स्वागत किया है, हिन्दू पक्ष के सदस्य गोपाल शर्मा ने कहा ये भोजशाला संरक्षित इमारत है इसके 300 मीटर दूर नमाज पढ़ी जा सकती है, उन्होंने कहा भोजशाला परिसर 300 मीटर का है इससे दूरी पर ही नमाज पढ़ना ही उचित है।
बहरहाल सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम व्यवस्था के तहत आज शुक्रवार को धार में मुस्लिम पक्ष ने नमाज नहीं पढ़ी और ये भी कहा है कि जब तक हमें भोजशाला परिसर के पास कोई जगह नहीं दी जाती तब तक यहाँ जुमे की नमाज नहीं पढ़ी जाएगी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं लेकिन हम हमारा अधिकार लेकर रहेंगे।






