रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धूम मचाती हुई दिखाई दे रही है। इस फिल्म को बेहतर बनाने के लिए मेकर्स ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए हैं। इस फिल्म में 70s और 90s के गाने भर-भरकर कर डाले गए हैं।
पूरी फिल्म में तीन-चार मिनट का गाना इस्तेमाल नहीं किया गया है बल्कि इसे दिलचस्प बनाने के लिए कुछ हिट ट्रैक यूज किए गए हैं जिससे सीन मजेदार नजर आ रहे हैं। कुछ बड़े टर्निंग पॉइंट पर भी गाने बजाए गए हैं जो इसे खास बनाने का काम कर रहे हैं। एक ऐसा ही गाना क्लाइमेक्स में बजाया गया है जो एक बड़े किरदार की असली पहचान को उजागर करता है। यह गाना 37 साल पहले बना था जिससे जमील जमाली यानी राकेश बेदी की असली पहचान के खुलासे के समय बैकग्राउंड में बजाया गया है।
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धुरंधर 2 में 37 साल पुराना गाना
ये गाना है ओये ओये तिरछी टोपी वाले जो 37 साल पुराना है और आईकॉनिक चार्टबस्टर सॉन्ग्स में से एक है। इसे माधुरी दीक्षित, सनी देओल, नसीरुद्दीन शाह और जैकी श्रॉफ की फिल्म त्रिदेव में फिल्माया गया था। गाने के बोल आनंद बक्षी ने लिखे थे और आवाज अमित कुमार और सपना मुखर्जी ने दी थी। इस गाने के लिए सपना को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्म फेयर अवार्ड दिया गया था।
अपना गाना सुन ऐसा रहा सपना का रिएक्शन
धुरंधर 2 में अपना गाना सुनने के बाद सपना मुखर्जी काफी खुश नजर आ रही हैं। उन्हें इस बात की खुशी हो रही है कि इस आईकॉनिक गाने से उनकी आवाज रिप्लेस नहीं की गई है। प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया के साथ ही बातचीत में उन्होंने कहा कि “आदित्य धर इसे सम्मान के साथ वापस लाने और फिल्म में इसे सार्थक जगह देने के लिए पूरे क्रेडिट के हकदार हैं। मेरी आवाज को बदला नहीं गया बल्कि इसका सम्मान किया गया यह एक कलाकार के लिए बहुत मायने रखता है।” सपना ने कहा कि “जब मैंने सुना कि अमित कुमार जी के साथ मेरी आवाज को बरकरार रखा गया है तो मुझे बहुत सम्मानित महसूस हुआ। कलाकार और उनके काम के प्रति इस तरह का सम्मान बहुत कम देखने को मिलता है। आज आप किसी गाने को दोबारा बना सकते हैं लेकिन उसकी आत्मा को नहीं बदल सकते।”
अलग अलग तरीके से किया गया पेश
धुरंधर 2 में जिस तरह से इस गाने को शामिल किया गया है उसे लेकर सपना ने कहा कि यह नया भी लग रहा है और जाना पहचाना भी लग रहा है। आवाज वैसे ही है, रूह वही है लेकिन माहौल सब कुछ बदल रहा है। पहले लोग इस पर नाचते थे और अब अलग ही तरह से महसूस कर रहे हैं। यह एक एहसास था जो कभी फीके नहीं पड़ते वह बस खुद को जाहिर करने का तरीका ढूंढ लेते हैं।