रणवीर सिंह की नई फिल्म ‘धुरंधर-2’ बॉक्स ऑफिस पर तो रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रही है, लेकिन रिलीज के साथ ही यह एक बड़े राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई है। फिल्म ने पहले दिन 145 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर इतिहास रच दिया, पर इसकी कहानी के एक किरदार ने सियासी भूचाल ला दिया है। आरोप है कि फिल्म में माफिया-राजनेता रहे अतीक अहमद से मिलता-जुलता एक किरदार गढ़ा गया है, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
विवाद का मुख्य कारण फिल्म का एक पात्र आतिफ अहमद है, जिसका नाम और चित्रण दिवंगत बाहुबली नेता अतीक अहमद की याद दिलाता है। फिल्म में इस किरदार को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ दिखाया गया है। कहानी के अनुसार, यह पात्र पाकिस्तान की मदद से भारत में नकली नोटों का नेटवर्क चलाता है और उत्तर प्रदेश में ‘पाकिस्तान समर्थित सरकार’ बनाने की साजिश रचता है।
सपा ने कहा- कमाई के लिए किसी को भी बदनाम करेंगे
इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने फिल्म निर्माताओं पर जानबूझकर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। सपा नेता एसटी हसन ने कहा कि यह सब फिल्म की कमाई बढ़ाने के लिए किया गया एक सोचा-समझा कदम है।
“ऐसे लोग किसी को भी बदनाम कर सकते हैं। इस फिल्म के जरिये समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की गई है, लेकिन जब सवाल उठाया जाएगा तो इसे काल्पनिक करार दिया जाएगा।”- एसटी हसन, समाजवादी पार्टी
उन्होंने कहा कि यह एक ट्रेंड बन गया है जहां विवाद पैदा करके फिल्मों को हिट कराने की कोशिश की जाती है, भले ही इससे सामाजिक ताने-बाने को कितना भी नुकसान पहुंचे।
AIMIM और कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने भी फिल्म की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे मुसलमानों को बदनाम करने की साजिश करार दिया। पठान ने कहा, “इस तरह की फिल्में सिर्फ एक साजिश के तहत बनाई जाती हैं, ताकि देश में नफरत फैलाई जा सके। इससे पहले भी कई प्रोपेगेंडा फिल्में बनाई जा चुकी हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि फिल्म बनाने वालों को समाज पर पड़ने वाले इसके असर की कोई परवाह नहीं है, वे सिर्फ पैसा कमाने के लिए झूठ और प्रोपेगेंडा का सहारा ले रहे हैं। वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी फिल्म पर नाराजगी जताते हुए कहा, “इस फिल्म की जितनी भी आलोचना की जाए वो कम है। क्या इस फिल्म के जरिये सड़कों पर लोगों को गोली मारने को बढ़ावा दिया जा रहा है?” इस तरह, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भले ही सफल हो, लेकिन यह राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर सवालों के घेरे में है।






