गुजरात के सियासी गलियारों में हलचल तब तेज हो गई जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को सूरत पहुंचे और वहां केंद्रीय जलशक्ति मंत्री एवं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल के घर गए। शाह ने पाटिल के पूरे परिवार से आत्मीय मुलाकात की और उनकी मां से भी आशीर्वाद लिया। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब प्रदेश अध्यक्ष के उत्तराधिकारी का चयन टलता जा रहा है। राजनीतिक हलकों में लंबे समय से यह अटकलें लगाई जाती रही हैं कि शाह और पाटिल के रिश्ते उतने मधुर नहीं हैं, लेकिन शाह के इस दौरे ने आलोचकों को करारा जवाब देते हुए साफ संदेश दिया कि पार्टी के भीतर सबकुछ सामान्य है।

सीआर पाटिल को गुजरात बीजेपी का सबसे कामयाब प्रदेश अध्यक्ष माना जाता है। उनके नेतृत्व में संगठन ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की और 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 182 में से 156 सीटें जीतीं। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष के नए चेहरे की घोषणा अब तक नहीं हो पाई है। शाह के पाटिल के घर जाने से यह कयास तेज हो गए हैं कि जल्द ही संगठन को नया कप्तान मिल सकता है। गुजरात की राजनीति में सूरत अब एक पावर सेंटर के रूप में उभर चुका है, जहां से सीआर पाटिल खुद केंद्रीय मंत्री हैं और शहर से पांच विधायक भूपेंद्र पटेल सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं। ऐसे में नवरात्रि से पहले शाह का यह दौरा अहम माना जा रहा है।

अमित शाह के सूरत दौरे से बढ़ी सियासी सरगर्मी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन की कमान अब शाह की पसंद के नेता को ही मिलेगी। पाटिल के घर जाना यह भी दर्शाता है कि शाह और पाटिल के बीच कथित दूरी की बातें महज अटकलें हैं। नई टीम के गठन में पाटिल के करीबियों को भी समायोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इससे संगठन के भीतर समन्वय की स्थिति बन सकती है। पाटिल का कार्यकाल पूरा हो चुका है और अब तक नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा नहीं होने से जिलों और शहरों में संगठनात्मक नियुक्तियां लंबित हैं।

शाह के दौरे की एक और अहम तस्वीर राजनीतिक संदेश दे गई। इस दौरान पार्टी के तमाम बड़े चेहरे एक ही फ्रेम में नजर आए। पाटिल से दूरी रखने वाले कहे जाने वाले पूर्णेश मोदी भी शाह और पाटिल के साथ खड़े दिखाई दिए। इसके अलावा सूरत के मेयर दक्षेण मेवाणी, विधायक संदीप देसाई और किशोरभाई कनाणी भी मौजूद रहे। यह तस्वीर साफ संकेत देती है कि शाह ने पार्टी की आंतरिक खींचतान को खत्म करने की कोशिश की है और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

अब सभी की नजरें शाह के इस प्रवास के बाद होने वाले ऐलान पर टिकी हैं। सूरत, राजकोट और अहमदाबाद के कार्यक्रमों के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के नए नाम की घोषणा की संभावना बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शाह का दौरा न केवल पाटिल और उनके समर्थकों को सशक्त संदेश है बल्कि यह भी बताता है कि बीजेपी आने वाले समय में गुजरात में एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती के साथ आगे बढ़ने वाली है।