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इंदौर के निजी स्कूल ने देशभर के सामने पेश की मिसाल, 1700 विद्यार्थियों की 1 करोड़ फीस माफ

Written by:Shruty Kushwaha
Published:
इंदौर के निजी स्कूल ने देशभर के सामने पेश की मिसाल, 1700 विद्यार्थियों की 1 करोड़ फीस माफ

इंदौर, आकाश धोलपुरे। शहर के एक स्कूल की हालिया घोषणा ने न सिर्फ इंदौर बल्कि समूचे देश के निजी स्कूलों को एक बड़ा संदेश दिया है। दरअसल, कोरोना संकटकाल के बीच लगे लॉकडाउन ने कई परिवारों के आर्थिक हालात खराब कर दिए हैं। वहीं कई पैरेंट्स की तो नौकरियां भी छूट गई है। ऐसे में इंदौर के एक निजी स्कूल ने छोटी क्लास से लेकर 12वीं तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की फीस माफ करने का निर्णय लिया और उसपर अमल भी किया।

बता दें कि आए दिन न सिर्फ इंदौर बल्कि प्रदेश भर के निजी स्कूलों द्वारा स्कूल फीस भरने के लेकर अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है, जिसके कारण न सिर्फ पेरेंट्स चिंतित हैं बल्कि कोरोना काल मे ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करने वाले स्टूडेंट्स भी इस बात से परेशान हैं। पालकों से पूछा जाए तो उनका साफ कहना है कि कम से कम कोरोना संकटकाल के बीच निजी स्कूल प्रबंधको को ये निर्णय लेना था कि पालकों की परेशानी न बढ़े।

इधर, इंदौर के धार रोड स्थित चोइथराम फाउंटेन स्कूल के 12वीं तक के स्टूडेंट्स के साथ नए एडमिशन वाले स्टूडेंट्स की फीस माफी के फैसले ने 1700 स्कूली बच्चो और उनके परिवार से एक बड़ा बोझ कम कर दिया है। चोइथराम फाउंटेन ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी ने बताया कि 1700 स्टूडेंट्स की फीस माफी के बाद स्कूल को 1 करोड़ रुपये की आय नहीं होगी, लेकिन पालकों को राहत मिलेगी क्योंकि अधिकतर पालक पीथमपुर सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों में काम करते है और प्रबंधन समझ सकता है वर्तमान में हालात क्या है।
स्कूल के ट्रस्टी के ऐतिहासिक निर्णय को इंदौर मिशनरी स्कूलों, फ्रेंचाइजी स्कूलों और अन्य निजी स्कूलों को एक सबक की तरह लेना चाहिए और परिस्थितियों को समझते हुए पूरी फीस नही तो कम से कम आधी फीस माफ कर देना चाहिए, जिसकी मांग अलग अलग पालक संघो द्वारा लगातार उठाई जा रही है। बता दें कि इंदौर निजी स्कूलों द्वारा लगातार पालकों पर दबाव बनाया जा रहा है जबकि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में साफ किया गया है स्कूल ट्यूशन फीस ले सकते हैं लेकिन किसी बच्चे को पढ़ाई से वंचित नही कर सकते हैं, बावजूद इसके पूरे साल की फीस की डिमांड निजी स्कूल प्रबंधकों द्वारा की जा रही है। हाल ही में इंदौर में फीस और ऑनलाइन क्लास से वंचित करने के मामले सीएम शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर महिला पालकों ने गुहार लगाई थी और सीएम ने स्कूलों की मनमानी को सख्त निर्देश दिए थे। वहीं इंदौर के सेंट रेफियल्स स्कूल में तो दो दिन पहले आधी फीस माफी की मांग पर पालकों ने हंगामा खड़ा कर दिया लेकिन स्कूल प्रबंधन पर इसका कोई असर नही पड़ा तो पालकों ने स्कूल परिसर में ही एक दिन की भूख हड़ताल की चेतावनी भी स्कूल प्रबंधन को दी है।

वहीं इससे जुड़ी एक दर्दनाक घटना भी हुई जब निपानिया क्षेत्र स्थित ग्रीन फील्ड स्कूल द्वारा फीस को लेकर बनाये जा रहे दबाव के चलते महालक्ष्मी नगर में रहने वाले 15 वर्षीय छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। हालाँकि इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। छात्र द्वारा जिन परिस्थितियों में ऐसा कदम उठाया गया उसका मलाल शहर के लाखों पेरेंट्स को है। इस मामले की जांच में पुलिस जुटी हुई है लेकिन इस खबर के बाद जागो पालक जागो समूह नाम से कैंपेन चलाया जा रहा है और छात्र को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए शिक्षक दिवस के अवसर बड़ी संख्या में पालको द्वारा शहर के रिगल तिराहे, बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहा, अहिल्या प्रतिमा राजबाड़ा और महाराणा प्रताप प्रतिमा महू नाका चौराहे सहित कुल 4 स्थानों पर शाम 6 से 7 बजे तक श्रद्धांजलि सभा का आयोजित किया जा रहा है जिसमें बड़ी संख्या में पेरेंट्स शामिल होने की संभावना है।

फिलहाल, इंदौर में कठिनतम दौर में चोइथराम फाउंटेन स्कूल ने एक मिसाल पेश की है।लेकिन अब भी कई स्कूल ऐसे हैं जिन्हें शिक्षा को नोबल प्रोफेशन की बजाय लाभ का धंधा ही माना है, जिसके चलते आज भी कई पालक निजी स्कूल प्रबंधन को जमकर कोस रहे हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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