हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ को अब तक मान्यता नहीं मिल पाई है। इससे न केवल कर्मचारियों की मांगें लंबित हैं, बल्कि जेसीसी (संयुक्त परामर्श समिति) की बैठक भी आयोजित नहीं हो सकी है। इससे कर्मचारियों में सरकार के प्रति नाराज़गी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने बजट भाषण में 15 मई तक तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) जारी करने का वादा किया था, लेकिन चार महीने बाद भी कर्मचारियों को यह लाभ नहीं मिला। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ और पेंशनर संघ के प्रतिनिधिमंडल कई बार मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वासन जरूर दिया, पर अब तक निर्णय नहीं हो पाया।
अढ़ाई लाख कर्मचारी और 1.78 लाख पेंशनर कर रहे इंतजार
प्रदेश में 1.83 लाख सरकारी कर्मचारी और बोर्ड-निगमों सहित कुल लगभग 2.5 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि पेंशनरों की संख्या 1.78 लाख है। इन सभी को जुलाई 2023 से जुलाई 2024 तक की तीन डीए किश्तें और जनवरी 2025 से एक किश्त लंबित है। इन चारों किश्तों के भुगतान के लिए सरकार को लगभग 3900 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की उठी मांग
कर्मचारी संगठन सेवानिवृत्ति की आयु को 58 से बढ़ाकर 59 वर्ष करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई अधिकारियों को सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति मिल रही है, तो यह सुविधा सभी को दी जाए। इसी बीच हिमाचल संयुक्त कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री 15 अगस्त के मौके पर डीए किश्त जारी करने की घोषणा कर सकते हैं।





