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हिमाचल विधानसभा सत्र, विपक्ष के आरोपों का जवाब, कई अहम मुद्दों पर चर्चा

Written by:Neha Sharma
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शिमला में शुरू हुए मानसून सत्र में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि 30 जून की रात आई आपदा के बाद सबसे पहले वह खुद सराज पहुंचे थे।
हिमाचल विधानसभा सत्र, विपक्ष के आरोपों का जवाब, कई अहम मुद्दों पर चर्चा

शिमला में शुरू हुए मानसून सत्र में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि 30 जून की रात आई आपदा के बाद सबसे पहले वह खुद सराज पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि पहली जुलाई को हेलिकॉप्टर से राशन पहुंचाया गया और डीसी व एसपी ने मौके पर लगातार काम किया। उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री भी हालात संभालने के लिए मंडी पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से संपर्क बनाए रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए थे और उन्हें हेलिकॉप्टर तक देने की पेशकश की गई थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का धन्यवाद भी उसी दिन किया जाएगा, जिस दिन राहत पैकेज आएगा।

सुक्खू ने दिया विपक्ष के आरोपों का जवाब

सत्र के पहले दिन सरकार ने दो अध्यादेश सदन में रखे। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने हिमाचल प्रदेश नगर पालिका संशोधन अध्यादेश-2025 पेश किया, जिसके तहत नए शहरी निकायों में चुनाव दो साल तक टाले जा सकेंगे। वहीं नगर एवं ग्राम योजना मंत्री राजेश धर्माणी ने तकनीकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2025 रखा, जिससे कुलपति की नियुक्ति किसी अन्य विश्वविद्यालय से की जा सके। इस दौरान शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने मटौर और तकीपुर कॉलेजों में खाली पदों की जानकारी दी और बताया कि युक्तिकरण की प्रक्रिया जारी है।

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने पटवारी भर्ती को लेकर जानकारी दी कि 874 पदों के लिए नए नियम फाइनल होते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने हिमकेयर योजना में बदलाव की जानकारी देते हुए कहा कि अब कार्ड साल में केवल चार महीने—मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर में ही बनेंगे। आपात स्थिति में पात्र व्यक्ति इन तिथियों से बाहर भी कार्ड बनवा सकेगा। वहीं विपक्ष ने थुनाग क्षेत्र में पीड़ितों पर दर्ज एफआईआर को वापस लेने की मांग की और सरकार पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाया।

सत्र के दौरान ग्राम रोजगार सेवकों का महंगाई भत्ता रोकने, जाति के आधार पर 138 गांवों के नाम बदलने, और बेसहारा गोवंश से हो रहे नुकसान जैसे मुद्दों पर भी सवाल-जवाब हुए। सरकार ने स्पष्ट किया कि ग्राम रोजगार सेवकों को नियमित करने का विचार नहीं है और फिलहाल धन की कमी के कारण उनका डीए रुका है। जाति आधारित गांवों के नाम बदलने के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है। वहीं पशुपालन मंत्री की ओर से बताया गया कि बेसहारा गोवंश से हुए नुकसान की भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन गोसदनों को सरकार और आयोग से आर्थिक मदद दी जा रही है।

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