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हिमाचल राज्यसभा चुनाव: आनंद शर्मा और प्रतिभा सिंह की दावेदारी में रजनी पाटिल की एंट्री, ‘बाहरी’ बनाम ‘स्थानीय’ पर बहस तेज

Written by:Rishabh Namdev
Published:
हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस में लॉबिंग तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और प्रतिभा सिंह के अलावा अब महाराष्ट्र से सांसद और प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल का नाम भी रेस में है। फरवरी की हार के बाद पार्टी 'बाहरी' उम्मीदवार को लेकर सतर्क है।
हिमाचल राज्यसभा चुनाव: आनंद शर्मा और प्रतिभा सिंह की दावेदारी में रजनी पाटिल की एंट्री, ‘बाहरी’ बनाम ‘स्थानीय’ पर बहस तेज

हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट पर होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा सांसद इंदू गोस्वामी का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है, जिसके लिए मार्च में चुनाव संभावित हैं। इस एक सीट के लिए कांग्रेस के कई दिग्गज नेता दावेदारी कर रहे हैं, जिससे पार्टी में ‘बाहरी’ बनाम ‘स्थानीय’ की बहस एक बार फिर छिड़ गई है।

वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को इस सीट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। लेकिन अब इस दौड़ में पार्टी की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल का नाम जुड़ने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान रजनी पाटिल को हिमाचल से राज्यसभा भेजने पर विचार कर रहा है।

हाईकमान की पसंद क्यों हैं रजनी पाटिल?

रजनी पाटिल वर्तमान में महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन उनका कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। महाराष्ट्र में बदले सियासी समीकरणों के चलते उनका वहां से दोबारा चुना जाना मुश्किल है। पाटिल को गांधी परिवार का करीबी माना जाता है और वह हिमाचल कांग्रेस की प्रभारी के तौर पर लगातार सक्रिय भी हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व उन्हें हिमाचल के रास्ते फिर से संसद भेजने की संभावना तलाश रहा है।

पिछली हार से सबक और ‘बाहरी’ का डर

हालांकि, किसी भी ‘बाहरी’ उम्मीदवार के नाम पर फैसला लेना कांग्रेस आलाकमान के लिए आसान नहीं होगा। पार्टी को इसी साल फरवरी में हुए राज्यसभा चुनाव का कड़वा अनुभव याद है, जब बहुमत होने के बावजूद पार्टी उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी हार गए थे। सिंघवी भी हिमाचल से नहीं थे और उनकी उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष था, जिसका नतीजा 6 विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के रूप में सामने आया और प्रदेश में सरकार पर संकट खड़ा हो गया था।

सूत्रों का कहना है कि प्रदेश नेतृत्व ने आलाकमान को इस स्थिति से अवगत करा दिया है। पार्टी दोबारा वैसी किसी भी परिस्थिति से बचना चाहेगी, इसलिए रजनी पाटिल के नाम पर भी अंदरूनी प्रतिक्रिया को परखा जा रहा है।

गुटों में बंटी कांग्रेस, सबकी अपनी दावेदारी

हिमाचल कांग्रेस में गुटबाजी भी इस चुनाव में एक अहम फैक्टर है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का खेमा आनंद शर्मा को राज्यसभा भेजना चाहता है। माना जाता है कि सीएम सुक्खू के समर्थन के बाद ही आनंद शर्मा को कांगड़ा से लोकसभा का टिकट मिला था।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का ‘होलीलॉज’ खेमा चाहता है कि प्रतिभा सिंह को राज्यसभा भेजा जाए। प्रतिभा सिंह पूर्व सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके समर्थकों का तर्क है कि उन्हीं की अध्यक्षता में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीता था, इसलिए उन्हें मौका मिलना चाहिए।

विधानसभा में कांग्रेस का बहुमत

संख्याबल के लिहाज से कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। 68 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 35 विधायकों की जरूरत है, जबकि कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं। अगर पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने में कामयाब रही तो जीत पक्की है। लेकिन उम्मीदवार का चयन ही यह तय करेगा कि फरवरी जैसी बगावत दोबारा होगी या नहीं।