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हिमाचल का बड़ा फैसला, मेडिकल कॉलेजों में साल में तीन बार होंगी सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्तियां

Written by:Neha Sharma
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्तियां साल में तीन बार होगी।
हिमाचल का बड़ा फैसला, मेडिकल कॉलेजों में साल में तीन बार होंगी सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्तियां

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पीजी पॉलिसी-2025 अधिसूचित कर दी है, जिसके तहत अब सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्तियां साल में तीन बार — मार्च, जुलाई और नवंबर के अंत में की जाएंगी। इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक सुचारु और नियमित हो सकेगी। साथ ही, सरकार ने एम्स चमियाना में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों के लिए राहत देते हुए फील्ड पोस्टिंग की शर्त हटा दी है। हालांकि, यह छूट केवल चमियाना के डॉक्टरों के लिए लागू होगी, अन्य कॉलेजों में यह नियम पहले की तरह रहेगा।

नीति में दो बार संशोधन

राज्य सरकार ने पहले 10 अक्टूबर को रेजिडेंट डॉक्टरों से जुड़ी नीति में बदलाव किया था, जिसे बाद में 15 अक्टूबर को संशोधित किया गया। संशोधित नीति के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सीएमओ कार्यालय और स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय में की गई पोस्टिंग को बॉन्ड अवधि के तहत परिधीय पोस्टिंग माना जाएगा। वहीं, कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर्स (CMO) की सेवाएं अब इस श्रेणी में शामिल नहीं होंगी। इसके अलावा, अब सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का चयन लिखित परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एम्स चमियाना को छोड़कर अन्य किसी भी शिक्षण संस्थान में की गई पोस्टिंग को परिधीय नहीं माना जाएगा।

राज्य के सात मेडिकल कॉलेजों में भर्तियां

नई नीति के तहत सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्तियां शिमला, नाहन, हमीरपुर, नेरचौक, चंबा, सोलन और चमियाना के मेडिकल कॉलेजों में की जाएंगी। अभ्यर्थियों के पास एमबीबीएस की डिग्री और हिमाचल प्रदेश मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण होना अनिवार्य होगा। पात्रता के लिए आयु सीमा 18 से 45 वर्ष रखी गई है, जबकि सेवानिवृत्त चिकित्सक 65 वर्ष तक कार्य कर सकेंगे।

स्थायी नियुक्ति का दावा नहीं कर सकेंगे उम्मीदवार

नीति के अनुसार, चयनित उम्मीदवारों को शपथपत्र देना होगा कि वे इस पद के लिए स्थायी नियुक्ति, पदोन्नति या अन्य सरकारी लाभ का दावा नहीं करेंगे। सरकार का कहना है कि यह नीति न केवल मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञों की कमी को दूर करेगी, बल्कि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध कराएगी। इस नई व्यवस्था से प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को स्थायित्व और दक्षता दोनों मिलेगी।