हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने आगामी पंचायत चुनावों से पहले आरक्षण नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। इस संशोधन के बाद अब जिलों के उपायुक्तों (DC) को पंचायत चुनाव के आरक्षण रोस्टर में अधिकतम 5 प्रतिशत तक बदलाव करने की विशेष शक्ति मिल गई है। दरअसल यह कदम राज्य में जमीनी स्तर पर चुनाव प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए उठाया गया है। बता दें कि राज्य सरकार ने ‘हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (चुनाव) संशोधन नियम, 2026’ को लागू कर दिया है। यह संशोधित नियम पंचायती राज विभाग द्वारा 30 मार्च 2026 को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से लागू किए गए हैं।

दरअसल इस अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पहले 23 मार्च 2026 को प्रकाशित नियमों पर आम जनता से प्राप्त आपत्तियों पर ‘भूलवश’ विचार नहीं किया जा सका था। अब सरकार ने उन सभी आपत्तियों और सुझावों पर गहनता से विचार करने के बाद ही ये नए संशोधित नियम अधिसूचित किए हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता की भागीदारी को सुनिश्चित करता है।

वहीं इन नए प्रावधानों के तहत, प्रदेश की कुल पंचायतों में से 95 प्रतिशत में आरक्षण पूर्व निर्धारित नियमों के आधार पर ही जारी रहेगा। केवल शेष 5 प्रतिशत पदों के लिए उपायुक्त अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह सुनिश्चित करता है कि बड़े पैमाने पर आरक्षण व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन विशिष्ट स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार सूक्ष्म समायोजन संभव होंगे।

किन पदों के रोस्टर में बदलाव कर सकेंगे डीसी?

पंचायती राज विभाग के सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, उपायुक्तों को तीन मुख्य स्तरों पर रोस्टर में बदलाव करने की शक्ति दी गई है:

  • पंचायत सदस्य: नियम 28 में संशोधन कर डीसी को एक पंचायत में कुल सीटों के अधिकतम 5 प्रतिशत तक ‘पंचायत सदस्यों’ के रोस्टर में बदलाव करने की शक्ति मिली है। इसका मतलब है कि अगर किसी पंचायत में 20 सदस्य सीटें हैं, तो डीसी अधिकतम एक सीट के आरक्षण में बदलाव कर सकेंगे।
  • पंचायत प्रधान: नियम 87 के तहत डीसी एक ब्लॉक में ग्राम पंचायत ‘प्रधानों’ के कुल पदों के अधिकतम 5 प्रतिशत तक रोस्टर बदल सकेंगे। यह ब्लॉक स्तर पर नेतृत्व के पदों के लिए लचीलापन प्रदान करेगा।
  • पंचायत समिति अध्यक्ष: नियम 88 में संशोधन कर डीसी को एक जिले में ‘पंचायत समिति अध्यक्षों’ (Chairman of Panchayat Samities) के कुल पदों में अधिकतम 5 प्रतिशत तक परिवर्तन करने का अधिकार सौंपा गया है। यह जिला स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं के शीर्ष पदों पर भी समायोजन की अनुमति देता है।

इस बदलाव के पीछे सरकार का तर्क राज्य की विशिष्ट और कठिन भौगोलिक स्थिति है। हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है, जहां कई क्षेत्रों में भारी भौगोलिक विषमताएं और विशिष्ट परिस्थितियां (geographical and other peculiar conditions) मौजूद हैं। इन विषमताओं के कारण पुराने रोस्टर को सख्ती से लागू करने में प्रशासन को कई व्यावहारिक दिक्कतें आ रही थीं। उदाहरण के लिए, दूर-दराज के इलाकों में स्थित कुछ पंचायतों में आबादी का घनत्व कम होता है और अक्सर विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियाँ होती हैं। ऐसे में, यदि किसी आरक्षित पद के लिए पर्याप्त योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते या रोस्टर स्थानीय आबादी के संतुलन से मेल नहीं खाता, तो यह चुनाव प्रक्रिया को जटिल बना देता है।