हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के हजारों यात्रियों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चिंता की खबर सामने आई है। दरअसल प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली HRTC बसों के पहिए 25 जून से थम सकते हैं, क्योंकि चालक-परिचालक यूनियन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल और चक्का जाम आंदोलन की चेतावनी दी है। यह चेतावनी उप मुख्यमंत्री के साथ तय बैठक रद्द होने और कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण दी गई है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
दरअसल यूनियन पदाधिकारियों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उप मुख्यमंत्री के साथ एक अहम बैठक तय थी, लेकिन वे बैठक में नहीं पहुंचे। उनकी गैरमौजूदगी में कर्मचारियों को अतिरिक्त सचिव के साथ बैठक करने को कहा गया, जिससे यूनियन में भारी नाराजगी फैल गई। इस अनदेखी से नाराज होकर कर्मचारी सचिवालय से बाहर निकल आए और पुराने बस अड्डे पर विरोध प्रदर्शन करते हुए धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।’
24 जून तक सभी लंबित मांगों को पूरा करने का अल्टीमेटम दिया
HRTC चालक-परिचालक यूनियन ने प्रदेश सरकार को 24 जून तक उनकी सभी लंबित मांगों को पूरा करने का साफ अल्टीमेटम दिया है। यूनियन ने स्पष्ट कहा है कि यदि इस तय समय तक उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो 25 जून से पूरे प्रदेश में चालक और परिचालक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इस बड़े आंदोलन के तहत प्रदेश भर में चक्का जाम किया जाएगा, जिससे परिवहन व्यवस्था पूरी तरह बंद हो जाएगी और आम जनजीवन प्रभावित होगा।
उप मुख्यमंत्री के साथ तय थी बैठक
वहीं यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि, “हमारी बैठक सीधे उप मुख्यमंत्री के साथ तय थी, लेकिन वे बैठक में शामिल नहीं हुए। कर्मचारियों की कई साल पुरानी और महत्वपूर्ण मांगें आज भी लंबित हैं, जिन पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। यदि 24 जून तक हमारी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो 25 जून से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल और चक्का जाम आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।” उन्होंने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की।
जानिए क्या है कर्मचारियों की प्रमुख मांगे?
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों की एक लंबी सूची है, जो वर्षों से पूरी नहीं हुई हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण 75 महीने का नाइट ओवरटाइम एरियर शामिल है, जिसकी अनुमानित राशि लगभग 150 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, वर्ष 2016 से लंबित वेतन संशोधन का बकाया, महंगाई भत्ता (DA) का बकाया और 4-9-14 पे स्केल का लाभ भी प्रमुख मांगों में शामिल हैं। निगम में चार भर्तियां लंबे समय से लंबित हैं और पिछले आठ महीनों से पदोन्नति की प्रक्रिया भी रुकी हुई है, जिससे कर्मचारियों में निराशा है। वेतन भुगतान में अनियमितता भी एक बड़ी चिंता है। कर्मचारियों ने बताया कि सैलरी कभी 5 तारीख को, कभी 10 तारीख को तो कभी 12 तारीख को मिलती है, जिससे उनके मासिक बजट और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है।
वहीं यूनियन नेताओं ने जोर देकर कहा कि बार-बार अपनी मांगें उठाने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद उनकी समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस और साफ कदम नहीं उठाया, तो पूरे प्रदेश की परिवहन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। HRTC चालक-परिचालक यूनियन के इस बड़े आंदोलन से शिमला सहित पूरे हिमाचल प्रदेश में बस सेवाएं पूरी तरह बंद हो सकती हैं, जिसका सीधा और गंभीर असर आम जनता, छात्रों और पर्यटकों पर पड़ेगा। यूनियन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी सभी मांगें पूरी होने तक किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं हैं।
इस गंभीर चेतावनी और आंदोलन की संभावना के बावजूद, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि 24 जून की समय सीमा तक सरकार और यूनियन के बीच कोई सहमति नहीं बनती है, तो 25 जून से प्रदेश भर में हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों के पहिए थम जाएंगे, जिससे राज्य में आने-जाने की बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी और लाखों लोग प्रभावित होंगे।






