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इस मंदिर में एक ही मूर्ति में विराजित हैं मां लक्ष्मी, काली और सरस्वती, धनतेरस और दिवाली पर उमड़ती है भीड़

Written by:Bhawna Choubey
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इस मंदिर में एक ही मूर्ति में मां लक्ष्मी, काली और सरस्वती विराजमान हैं, जो इसे एक अद्वितीय धार्मिक स्थल बनाती है। धनतेरस और दिवाली पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जब लोग अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दर्शन करने आते हैं।
इस मंदिर में एक ही मूर्ति में विराजित हैं मां लक्ष्मी, काली और सरस्वती, धनतेरस और दिवाली पर उमड़ती है भीड़

Diwali 2024: भारत जिसे मंदिरों का घर माना जाता है। एक ऐसा देश है जहां हर कस्बे हर गांव और हर शहर में कोई ना कोई पवित्र और प्रसिद्ध मंदिर देखने को हमें जरूर मिलता है। इन मंदिरों में से एक प्रमुख स्थान उत्तर प्रदेश का वाराणसी है। जिसे कई लोग सबसे पवित्र शहरों में से एक मानते हैं।

कुछ दिनों के बाद देशभर में दिवाली का त्यौहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं की दिवाली पर धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा आराधना की जाती है। ऐसे में दिवाली आते-आते बहुत लोग माता लक्ष्मी के मंदिर में दर्शन करने जाने के लिए प्लान बनाते हैं। अगर आप भी इन्हीं लोगों में से हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है।

वाराणसी

गंगा नदी के किनारे बसा वाराणसी काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। जहां श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ पूजा अर्चना करने दूर-दूर से आते हैं। इसके साथ ही मणिकर्णिका घाट जो कि शमशान घाट के रूप में जाना जाता है। यहां की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ाता है।

वाराणसी का यह आदित्य संयोजन न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई को भी दर्शाता है। लेकिन हम आपको बता दें, कि वाराणसी काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है लेकिन इससे शहर में और भी ऐसे अन्य मंदिर हैं जहां लोग दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं।

लक्ष्मी कुंड मंदिर, वाराणसी

वाराणसी में स्थित लक्ष्मी कुंड मंदिर एक अद्भुत धार्मिक स्थल है जहां एक साथ तीन देवियों मां लक्ष्मी काली और सरस्वती की पूजा की जाती है यह मंदिर न केवल अपनी आध्यात्मिक महत्वता के लिए प्रसिद्ध है।

बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक आदित्य अनुभव भी प्रदान करता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। जैसे-जैसे दिवाली का त्यौहार नजदीक आता है वैसे-वैसे इस मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है।

एक ही मूर्ति में विराजमान हैं तीनों देवियां

लक्ष्मी कुंड मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने यहां 16 दिनों तक उपवास रखा था। इस दौरान माता लक्ष्मी आई और माता पार्वती से साथ चलने को कहा। लेकिन माता पार्वती ने मना कर दिया उसके बाद माता लक्ष्मी यहां विराजमान होकर पूजा अर्चना करने लगी और उनकी भक्ति से प्रेरित होकर मां काली और सरस्वती भी इस वक्त स्थान पर आ गई इस प्रकार एक ही मूर्ति में तीनों देवियों का बस हो गया जो इस मंदिर को विशेष बनाता है।

धनतेरस और दिवाली पर भारी संख्या में आते हैं लोग

लक्ष्मी कुंड मंदिर स्थानीय लोगों के लिए एक अत्यंत पवित्र स्थल तो है ही, इसके अलावा दूर-दूर से लोग इस मंदिर में मात्र माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खासकर धनतेरस और दिवाली के अवसर पर यह मंदिर भक्तों से भर जाता है।

जब लोग देश की हर कोने से यहां पहुंचते हैं। दिवाली के दौरान मंदिर को खूबसूरत फूलों और जगमगाती लाइटों से सजाया जाता है। मंदिर की गलियों में रंग बिरंगी लाइटें दूर-दूर तक लगाई जाती है। ज्यादातर इस मंदिर में महिलाएं अपने पुत्र और पुत्री की कामना लेकर आती हैं।

 

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Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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