शहर की पहचान बन चुकी सराफा चौपाटी और छप्पन दुकान की गलियों में इन दिनों गैस की पारंपरिक महक की जगह एक खामोशी छाई हुई है। ईरान-अमेरिका तनाव से उपजे वैश्विक ईंधन संकट के कारण प्रशासन ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगा दी है, जिसका सीधा असर इंदौर के जीवंत स्ट्रीट फूड कल्चर पर पड़ा है। गैस की किल्लत ने हजारों होटल, रेस्तरां और खान-पान कारोबारियों को संकट में डाल दिया है।
प्रसिद्ध सराफा बाजार, जो देर रात तक गरमागरम व्यंजनों से गुलजार रहता था, अब वहां की रौनक फीकी पड़ गई है। गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता के कारण दुकानदारों ने जुगाड़ का रास्ता अपनाते हुए इंडक्शन चूल्हे और इलेक्ट्रिक ग्रिल का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। जहां पहले पारंपरिक कड़ाही में भजिए तले जाते थे, वहीं अब इंडक्शन पर काम चलाया जा रहा है। सैंडविच और अन्य ग्रिल्ड आइटम भी इलेक्ट्रिक मशीनों पर बन रहे हैं।
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इंडक्शन बना सहारा, स्वाद पर पड़ा असर
सराफा के एक दुकानदार ने बताया कि गैस नहीं मिलने पर कारोबार बंद नहीं किया जा सकता, इसलिए इंडक्शन का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने माना कि इससे स्वाद में थोड़ा फर्क तो आया है, लेकिन ग्राहकों को लौटाने से बेहतर है कि किसी तरह काम चलाया जाए। यह ‘इंडक्शन क्रांति’ सिर्फ सराफा तक सीमित नहीं है, बल्कि छप्पन दुकान जैसे लोकप्रिय ठिकानों पर भी यही स्थिति है। व्यापारी किसी तरह अपना व्यवसाय चला रहे हैं, लेकिन पहले जैसी भीड़ अब नजर नहीं आ रही है।
“जब से स्वच्छता अभियान चल रहा है, हम धुआं रहित ईंधन पर जोर दे रहे हैं। तंदूर और सिगड़ी पर प्रतिबंध के बाद से हम कमर्शियल एलपीजी पर ही निर्भर थे। अगर सिलेंडर नहीं मिले तो जल्द ही दुकानों पर ताले लगना शुरू हो जाएंगे।” — एक स्थानीय कारोबारी
होटल-कैटरिंग सेक्टर और उद्योग भी प्रभावित
यह संकट केवल स्ट्रीट फूड तक सीमित नहीं है। शहर के करीब 400 कैटरर्स, 100 से ज्यादा होटल, 250 बड़े रेस्तरां और 12 हजार से अधिक छोटे-बड़े खान-पान कारोबारी सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। शादियों और अन्य समारोहों में भी खाने-पीने की व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा, फेब्रिकेशन, ऑटोमोबाइल और वेल्डिंग जैसे लगभग 2000 छोटे उद्योग भी कमर्शियल सिलेंडर पर निर्भर हैं, जो अब वैकल्पिक ईंधन तलाश रहे हैं।
बाजार में इंडक्शन और इलेक्ट्रिक चूल्हों की भारी मांग
गैस संकट ने अचानक इलेक्ट्रिक उपकरणों के बाजार में तेजी ला दी है। दुकानदारों के अनुसार, जो बिक्री पहले महीने भर में होती थी, वह अब कुछ ही दिनों में हो रही है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ होटल और रेस्तरां मालिक भी कमर्शियल इलेक्ट्रिक उपकरण खरीद रहे हैं। होटल और रेस्तरां में बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए पांच से छह किलोवाट क्षमता वाले कमर्शियल इंडक्शन की मांग बढ़ी है, जिसे पूरा करने में निर्माता भी संघर्ष कर रहे हैं। इंदौर के बाजारों में आसपास के ग्रामीण इलाकों के ढाबा संचालक भी इंडक्शन की तलाश में चक्कर काट रहे हैं।