इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में विदेशी छात्रों के लिए हॉस्टल का निर्माण शुरू हो गया है। करीब 13 साल पहले 2013 में बनी इस योजना पर अब जाकर अमल हो रहा है, जिसमें दो करोड़ रुपए का खर्च आएगा। यह हॉस्टल विश्वविद्यालय के खंडवा रोड स्थित तक्षशिला परिसर में ऑडिटोरियम के पास बन रहा है।
इस अंतरराष्ट्रीय हॉस्टल की योजना तत्कालीन कुलपति प्रो. डीपी सिंह के कार्यकाल में 2013 में बनाई गई थी। इसके बाद 2017 में तत्कालीन कुलपति डॉ. नरेंद्र धाकड़ ने भी इसे आगे बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन योजना लागू नहीं हो सकी। इतने सालों तक यह सिर्फ कागजों पर रही, जिससे डीएवीवी को अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने में दिक्कतें आ रही थीं। फंड की कमी और प्रशासनिक देरी के कारण यह परियोजना लंबे समय से ठंडे बस्ते में थी। अब वर्तमान डीएवीवी प्रबंधन ने इस पुरानी योजना को गति दी है, जिसे विश्वविद्यालय के विकास के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
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डीएवीवी को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान मिलेगी
विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इस हॉस्टल के बनने से अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी होगी और डीएवीवी को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान मिलेगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-यूएसएचए) के तहत लागू की जा रही है। पीएम-यूएसएचए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) का ही नया और संशोधित रूप है, जिसका उद्देश्य देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और इक्विटी में सुधार करना है। पीएम-यूएसएचए के तहत डीएवीवी को कुल 20 करोड़ रुपए का अनुदान स्वीकृत हुआ है, जिसमें से इस हॉस्टल के निर्माण के लिए भी फंड आवंटित किया गया है। यह फंडिंग विश्वविद्यालय को अपनी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने और आधुनिक शैक्षिक माहौल तैयार करने में मदद कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखते हुए इस हॉस्टल को विशेष रूप से डिजाइन किया जा रहा है। यह जी+1 यानी दो मंजिला भवन होगा, जो लगभग 15 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में फैला होगा। इसमें कुल 50 कमरे बनाए जाएंगे। हर कमरे में बेडरूम, किचन और अटैच बाथरूम जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी, ताकि विदेशी छात्रों को घर जैसा माहौल मिल सके। यह सुविधा उन्हें भारत में पढ़ाई के दौरान किसी भी तरह की परेशानी से बचाएगी और उन्हें बेहतर अनुभव देगी। इस पूरे निर्माण कार्य की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश भवन विकास निगम को सौंपी गई है, जिससे गुणवत्ता और समय पर काम पूरा होने की उम्मीद है। हॉस्टल तैयार होने के बाद डीएवीवी विदेशी छात्रों को बेहतर आवास सुविधा देने वाले गिने-चुने विश्वविद्यालयों में शामिल हो जाएगा, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भी सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है।
स्कूल ऑफ डेटा साइंसेज एंड फोरकास्ट की नई बिल्डिंग तैयार की जा रही
अंतरराष्ट्रीय हॉस्टल के साथ ही, तक्षशिला परिसर में एक और महत्वपूर्ण बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा है। स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस के पास स्कूल ऑफ डेटा साइंसेज एंड फोरकास्ट की नई बिल्डिंग तैयार की जा रही है। यह जी+2 संरचना में होगी और इसमें आधुनिक क्लासरूम, प्रोफेसरों के लिए केबिन और अन्य जरूरी सुविधाएं होंगी। इस परियोजना पर भी लगभग दो करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जो विश्वविद्यालय के तकनीकी शिक्षा के विस्तार में सहायक होगा। यह नई बिल्डिंग डेटा साइंस जैसे उभरते क्षेत्रों में रिसर्च और शिक्षा को बढ़ावा देगी, जिससे छात्रों को भविष्य की तकनीक से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
डीएवीवी ने सिर्फ निर्माण कार्यों पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि अकादमिक ढांचे में भी कई बड़े बदलाव किए हैं। विश्वविद्यालय ने मैथ्स और स्टैटिस्टिक्स विभाग को आपस में मर्ज करने का निर्णय लिया है, जिससे अब ये दोनों एक ही विभाग के रूप में काम करेंगे। इस विलय का मुख्य उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाना और छात्रों को अधिक एकीकृत और व्यापक ज्ञान प्रदान करना है। इसी तरह, स्कूल ऑफ योग और स्कूल ऑफ फिजिकल एजुकेशन को भी मर्ज किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य और वेलनेस से संबंधित शिक्षा को एक ही छत के नीचे लाया जा सके।
इन विलयों के अलावा, लाइफ लॉन्ग लर्निंग विभाग अब नए सत्र से स्किल डेवलपमेंट सेंटर में विलय हो जाएगा, जो छात्रों को रोजगारोन्मुखी कौशल सिखाने पर अधिक जोर देगा। इससे छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा। सेंटर फॉर लॉजिस्टिक्स का भी स्कूल ऑफ टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी एंड मैनेजमेंट में विलय किया जा रहा है, ताकि संबंधित क्षेत्रों में एकीकृत शिक्षा प्रदान की जा सके और इन उद्योगों के लिए कुशल पेशेवर तैयार किए जा सकें। इन संरचनात्मक बदलावों से डीएवीवी अपनी शैक्षिक व्यवस्था को और प्रभावी और आधुनिक बनाना चाहता है।
इन संरचनात्मक बदलावों और निर्माण परियोजनाओं के साथ ही, डीएवीवी जल्द ही 10 नए कोर्स भी शुरू करने जा रहा है। इनमें ट्राइबल इंस्टिट्यूट के अंतर्गत 30 सीटों के साथ एमबीए ट्राइबल डेवलपमेंट कोर्स विशेष रूप से शामिल है, जो आदिवासी समुदाय के विकास और उनकी जरूरतों पर केंद्रित होगा। यह कोर्स आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा। ये नए कोर्स छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने के अवसर प्रदान करेंगे और विश्वविद्यालय की शैक्षिक विविधता को बढ़ाएंगे, जिससे डीएवीवी एक बहुआयामी शिक्षण संस्थान के रूप में उभरेगा।