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इंदौर-खंडवा नई ब्रॉडगेज रेल लाइन को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी, 454 हेक्टेयर वनभूमि पर 16 सुरंगों का निर्माण जल्द होगा शुरू

Written by:Banshika Sharma
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लंबे समय से अटकी इंदौर-खंडवा ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना को पर्यावरण और वन मंत्रालय से प्रारंभिक मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना के तहत 454 हेक्टेयर वनभूमि का उपयोग होगा, जिसमें 1.34 लाख पेड़ काटे जाएंगे और 20 किलोमीटर के क्षेत्र में 16 सुरंगें बनाई जाएंगी।
इंदौर-खंडवा नई ब्रॉडगेज रेल लाइन को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी, 454 हेक्टेयर वनभूमि पर 16 सुरंगों का निर्माण जल्द होगा शुरू

मालवा और निमाड़ क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही इंदौर-खंडवा नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना ने एक बड़ी बाधा पार कर ली है। पर्यावरण और वन मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए प्रारंभिक अनुमति दे दी है, जिससे दशकों से अटके इस प्रोजेक्ट का रास्ता साफ हो गया है। इस मंजूरी के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

इस परियोजना के तहत लगभग 454 हेक्टेयर वनभूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। रेलवे लाइन बिछाने के लिए करीब 20 किलोमीटर के पहाड़ी क्षेत्र में 16 सुरंगों का भी निर्माण किया जाना है। सांसद शंकर लालवानी ने इस विकास पर खुशी जताते हुए कहा कि वन भूमि के उपयोग से जुड़ी सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे अब काम में तेजी लाई जा सकेगी।

1.34 लाख पेड़ कटेंगे, 16 सुरंगें बनेंगी

रेलवे द्वारा प्रस्तुत योजना के अनुसार, इस परियोजना के लिए कुल 1 लाख 51 हजार पेड़ों को चिह्नित किया गया था। हालांकि, समीक्षा के बाद लगभग 17 हजार पेड़ों को बचाने का निर्णय लिया गया है। इसके बावजूद, लाइन बिछाने के लिए करीब 1 लाख 34 हजार पेड़ों की कटाई की जाएगी।

परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा सुरंगों का निर्माण है। इसके तहत:

  • बड़िया से बेका के बीच लगभग 4.1 किलोमीटर लंबी सुरंग बनेगी।
  • चोरल से मुख्तियार बलवाड़ा के बीच 2.2 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण होगा।
  • राजपुर के पास करीब 1.6 किलोमीटर की सुरंग बनाई जाएगी।
  • इनके अलावा, लगभग 12.1 किलोमीटर के क्षेत्र में 13 अन्य छोटी सुरंगें भी प्रस्तावित हैं।

पुरानी लाइन की जमीन वापसी और ग्रीन कॉरिडोर की शर्त

पर्यावरण मंत्रालय की रीजनल कमेटी (आरईसी) ने रेलवे के सामने कुछ शर्तें भी रखी हैं। कमेटी ने पूछा है कि यदि पुरानी मीटरगेज रेल लाइन का भविष्य में कोई उपयोग नहीं है, तो उसे हटाकर जमीन वन विभाग को वापस सौंपी जाए। इसके साथ ही, रेलवे को एक विस्तृत ‘ग्रीन रेलवे कॉरिडोर प्रबंधन योजना’ तैयार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

“वन भूमि उपयोग से जुड़ी आवश्यक सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे काम को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।” — शंकर लालवानी, सांसद

गौरतलब है कि इंदौर वनमंडल ने पिछले साल अक्टूबर में इस परियोजना से संबंधित फाइल भोपाल मुख्यालय भेजी थी, जिसके बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ी। मंत्रालय ने 10 मार्च 2026 से 9 जून 2026 के बीच निर्माण कार्य शुरू करने की अस्थायी अनुमति दी है, जिससे यह स्पष्ट है कि जमीनी काम शुरू होने में अभी कुछ समय लग सकता है। यह रेल लाइन इंदौर को सीधे दक्षिण भारत से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों को गति मिलेगी।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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