मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर के लिंबोदी तालाब पहुंचकर श्रमदान किया। इसी के साथ उन्होंने वहां उपस्थित नागरिकों को जल बचाने और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए शपथ भी दिलाई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तालाब के गहरीकरण और संरक्षण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि “जल संरक्षण आने वाले कल को सुरक्षित करने का सामूहिक संकल्प है।” सीएम ने कहा कि जल संकट से निपटने के लिए सिर्फ सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं बल्कि इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरुरी है।
मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी से विजन को साकार करने की बात कही
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जल संरक्षण के विजन को साकार करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण के संकल्प को साकार करने के लिए मध्यप्रदेश में गुड़ी पड़वा से जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू किया गया था। अभियान के अंतर्गत अब तक प्रदेशभर में दो लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इनमें तालाबों का गहरीकरण, नदियों की सफाई, जल संरचनाओं का पुनर्जीवन, कुओं और बावड़ियों का संरक्षण तथा वर्षा जल संचयन से जुड़े कार्य शामिल हैं।
श्रमदान का महत्व समझाया
सीएम ने कहा है कि इंदौर जल संरक्षण के क्षेत्र में लगातार उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। शहर में 10 से अधिक बड़े तालाबों और 250 से ज्यादा कुओं और बावड़ियों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार का कार्य किया गया है। इससे न सिर्फ जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भूजल स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि अमृत 2.0 योजना के तहत इंदौर के बिलावली, लिंबोदी और छोटा सिरपुर तालाब के संरक्षण, जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ उन्हें पर्यावरण और पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित करना है।
मुख्यमंत्री ने श्रमदान को अभियान की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि जब समाज स्वयं जल स्रोतों के संरक्षण के लिए आगे आता है, तब स्थायी और प्रभावी परिणाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।






