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2.8 करोड़ की कमाई, 9.76 करोड़ की संपत्ति! महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी पर लोकायुक्त का शिकंजा

Written by:Bhawna Choubey
Published:
इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। शुरुआती जांच में आय से कहीं अधिक संपत्ति मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी छापेमार कार्रवाई की है। महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के आवास, व्यावसायिक परिसरों और अन्य ठिकानों पर बुधवार सुबह से जांच जारी है। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।

अधिकारियों के अनुसार कंडवाल की कुल वैध आय लगभग 2.8 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि अब तक की जांच में करीब 9.76 करोड़ रुपये की संपत्ति और निवेश का पता चला है। यह उनकी घोषित आय से लगभग 241 प्रतिशत अधिक बताया जा रहा है। इसी आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है।

लोकायुक्त जांच में सामने आई करोड़ों की संपत्ति

लोकायुक्त की टीम ने इंदौर के स्कीम नंबर-103 स्थित पांच मंजिला भवन, जिम, सुपर स्टोर और अन्य परिसरों में एक साथ दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान इंदौर, धार और पीथमपुर क्षेत्र में कई जमीनों और प्लॉटों की जानकारी सामने आई है।

रिकॉर्ड के मुताबिक स्कीम नंबर-103 में स्थित व्यावसायिक भूखंड पर बना बहुमंजिला भवन सबसे बड़ी संपत्तियों में शामिल है। इसके अलावा स्कीम नंबर-140 में दो प्लॉट, धार जिले के तारपुरा, बनेड़िया और बेकल्या गांवों में कृषि भूमि तथा कई अन्य निवेश भी जांच के दायरे में हैं।

जांच के दौरान बैंक ऑफ इंडिया की सराफा शाखा में एक बैंक लॉकर की जानकारी भी मिली है। अब लोकायुक्त टीम दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि संपत्ति खरीदने के लिए धन का स्रोत क्या था और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी रही है।

आय से अधिक संपत्ति मामलों पर क्यों बढ़ी सख्ती?

विशेषज्ञों का मानना है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सिर्फ जमीन और मकान की कीमत ही नहीं देखी जाती, बल्कि बैंक खातों, निवेश, लॉकर, व्यावसायिक हिस्सेदारी और अन्य आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जाती है। इसी वजह से ऐसे मामलों में शुरुआती आंकड़े बाद में और बढ़ सकते हैं।

लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार कंडवाल वर्ष 1996 से सरकारी सेवा में हैं। करीब 30 वर्षों की नौकरी के दौरान उनकी अनुमानित वैध आय और उपलब्ध संपत्ति का तुलनात्मक अध्ययन किया गया, जिसके बाद छापेमारी की कार्रवाई को मंजूरी दी गई। फिलहाल टीम दस्तावेजों, रजिस्ट्री रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और संपत्ति से जुड़े अन्य प्रमाण जुटा रही है।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि सरकारी विभागों में आर्थिक अनियमितताओं को लेकर निगरानी एजेंसियां सक्रिय हैं। मामले की जांच पूरी होने के बाद संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन किया जाएगा और यदि अतिरिक्त संपत्ति या निवेश सामने आते हैं तो अनुपातहीन संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ सकता है। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

Bhawna Choubey
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मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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