इंदौर में आमतौर पर नए बोरिंग कराने पर रोक मार्च के आसपास लगाई जाती है लेकिन इस बार नगर निगम इसे नवंबर से लागू करने की तैयारी कर रहा है। दरअसल इसका मकसद गर्मी शुरू होने से पहले भूजल के तेजी से इस्तेमाल को रोकना है। इस साल मार्च में 10 हजार से ज्यादा बोरिंग सूख गए थे। इसके बाद कई लोगों को पानी के लिए टैंकर मंगवाने पड़े। वहीं अब गर्मी की परेशानी को याद करते हुए लोग पहले से बोरिंग करा रहे हैं। जिनके बोरिंग में पानी कम हो गया है वे भी री-बोरिंग कराकर उसकी गहराई बढ़वा रहे हैं।
ऐसे में यह साफ देखा जा रहा है कि इंदौर में पानी को लेकर चिंता बढ़ गई है। शहर में नए बोरिंग कराने की मांग बढ़ने से उनकी लागत भी बढ़ रही है। लोग गर्मी आने से पहले ही पानी का इंतजाम करना चाहते हैं लेकिन लगातार नए बोरिंग कराने से भूजल पर दबाव बढ़ सकता है। इसी स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने नवंबर से नए बोरिंग के खनन पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है।
इस साल तालाब भी पर्याप्त नहीं भर पाए
दरअसल शहर के बिलावली, पिपलियापाला और निरंजनपुर जैसे इलाकों में आसपास तालाब होने के कारण भूजल स्तर आमतौर पर बेहतर रहता है। लेकिन इस साल तालाब भी पर्याप्त नहीं भर पाए हैं। ऐसे में आशंका है कि आने वाले महीनों में तालाबों का पानी कम होने के साथ भूजल स्तर पर भी असर पड़ेगा। अगर तालाबों में पानी कम रहा और बोरिंग से पानी निकालना जारी रहा तो अगले साल गर्मियों में बड़ी संख्या में बोरिंग सूख सकते हैं। इससे उन इलाकों में भी परेशानी बढ़ सकती है जहां फिलहाल बोरिंग से पानी मिल रहा है। नगर निगम की तैयारी का मकसद यही है कि गर्मी शुरू होने से पहले बोरिंग के इस्तेमाल और नए खनन पर नियंत्रण किया जा सके। हालांकि नए बोरिंग पर रोक कब से लागू होगी और किन क्षेत्रों में इसका दायरा रहेगा यह प्रस्ताव पर होने वाले फैसले के बाद ही साफ होगा।
नियम नहीं मानने वालों पर कार्रवाई
वहीं इंदौर में जलसंकट से निपटने के लिए नगर निगम वाटर रिचार्जिंग पर भी जोर दे रहा है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक शहर में वाटर रिचार्जिंग अनिवार्य कर दी गई है। हाल ही में कुछ संस्थानों में जांच के दौरान वाटर रिचार्जिंग की व्यवस्था नहीं मिलने पर उनके चालान भी बनाए गए हैं। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाना है ताकि भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सके। वाटर रिचार्जिंग के साथ बोरिंग और पानी के इस्तेमाल पर नजर रखना भी जरूरी है। बारिश का पानी जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था तभी असरदार हो सकती है जब उसका सही तरीके से रखरखाव हो और उसका इस्तेमाल लगातार किया जाए। वहीं तालाबों में पानी का स्तर भी आने वाले महीनों में अहम रहेगा। इस साल तालाब पर्याप्त नहीं भरने के कारण भूजल को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में नगर निगम के सामने एक तरफ गर्मियों में पानी की जरूरत पूरी करने और दूसरी तरफ भूजल पर बढ़ते दबाव को रोकने की चुनौती है।






