इंदौर में सफाईकर्मियों की पक्की नौकरी और दूसरी मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को और ज्यादा उग्र हो गया है। हालात तब और गरमा गए जब वाल्मीकि समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कल्याणे ने शहर के मुख्य गांधी प्रतिमा परिसर में पहुंचकर विरोधस्वरूप अपना मुंडन करवा लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त प्रताप करोसिया का प्रतीकात्मक पिंडदान भी कर डाला।
28 साल से स्थायी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं कर्मचारी
सफाईकर्मी संगठन की मुख्य मांग यह है कि सभी पुराने कर्मचारियों को जल्द से जल्द स्थायी नियुक्ति दी जाए। इसके अलावा समान काम के लिए समान वेतन, ठेका प्रथा को पूरी तरह खत्म करने, जोखिम भत्ता और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने की मांग लंबे समय से की जा रही है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि कर्मचारी पिछले लगभग 28 सालों से स्थायी होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्याओं का कोई स्थायी हल नहीं निकल पाया है।
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इंदौर को आठ बार नंबर-1 बनाया
संगठन के नेताओं का दर्द साफ झलकता है कि देश भर में इंदौर को स्वच्छता में आठ बार नंबर-1 बनाने में इन्हीं सफाईकर्मियों की खून-पसीना एक करने वाली मेहनत शामिल है। इसके बावजूद आज भी इन कर्मचारियों को स्थायी नौकरी और सम्मानजनक वेतन नहीं मिल पा रहा है। महज दस हजार रुपए महीने की मामूली तनख्वाह में आज के समय में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
निगम कमिश्नर से मुलाकात न होने और दबाव बनाने का आरोप
प्रतिनिधियों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि वे नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल से मिलने के लिए तीन बार गए, लेकिन उन्हें मिलने का समय तक नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए भी पिछले 20 दिनों से कोशिश जारी है, पर कोई सफलता नहीं मिली। इसके अलावा, आंदोलन को दबाने के लिए 17 कर्मचारियों के घरों पर पुलिस और दरोगा भेजे गए, उन्हें एफआईआर की धमकी दी गई और जबरन आंदोलन खत्म करने का दबाव बनाया गया।
मांगें पूरी न होने पर उज्जैन में आमरण अनशन की चेतावनी
संगठन ने अब साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो वे अपने इस आंदोलन को और आगे बढ़ाएंगे। इंदौर में लगातार कोशिशों के बाद भी जब अधिकारियों ने सुध नहीं ली, तो अब इस आंदोलन को उज्जैन तक ले जाने का फैसला किया गया है। संगठन ने दो टूक कह दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह संघर्ष और विरोध प्रदर्शन ऐसे ही जारी रहेगा।
