देश में लगातार स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान हासिल करने वाला इंदौर अब एक और बड़ा रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। दरअसल नगर निगम ने 30 जुलाई को “सेग्रीगेशन सेल्फी” अभियान शुरू किया है, जिसमें पांच लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान के जरिए शहर स्वच्छता के साथ जनभागीदारी का नया उदाहरण पेश करना चाहता है।
दरअसल इंदौर की पहचान सिर्फ साफ-सुथरी सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां कचरा प्रबंधन को लेकर लगातार नए प्रयोग किए जाते रहे हैं। वहीं इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए नगर निगम ने इस बार विश्व रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य तय किया है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के “सफाई अपनाओ, बीमारी भगाओ” अभियान के तहत यह आयोजन किया जा रहा है। इसमें नागरिक अपने घरों या कार्यस्थल पर गीला, सूखा और अन्य श्रेणी के कचरे को अलग-अलग रखकर उसके साथ सेल्फी लेंगे। नगर निगम का मानना है कि जब लोग खुद इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे, तब कचरा पृथक्करण सिर्फ सरकारी नियम नहीं बल्कि रोजमर्रा की आदत बन जाएगा। यही वजह है कि इस अभियान में स्कूल, कॉलेज, व्यापारी संगठन, रहवासी संघ, स्वयंसेवी संस्थाएं और सफाई मित्रों को भी बड़े स्तर पर जोड़ा गया है।
कैसे बनेगा विश्व रिकॉर्ड?
वहीं विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए सिर्फ बड़ी संख्या में लोगों का जुटना काफी नहीं होता, बल्कि पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण भी जरूरी होता है। नगर निगम ने इसके लिए हर वार्ड और जोन में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है। घर-घर कचरा संग्रहण करने वाले वाहनों पर भी विशेष सेल्फी प्वाइंट बनाए जाएंगे, ताकि लोग आसानी से अभियान में हिस्सा ले सकें। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर भी सेल्फी जोन तैयार किए जाएंगे। सभी तस्वीरों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिससे रिकॉर्ड के लिए आवश्यक प्रमाण तैयार किया जा सके। नगर निगम का कहना है कि यह अभियान सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि लोगों को लंबे समय तक कचरा अलग-अलग रखने के लिए प्रेरित करने की कोशिश है। अगर यह रिकॉर्ड बनता है तो इंदौर एक बार फिर साबित करेगा कि स्वच्छता सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि नागरिकों की भागीदारी से ही संभव होती है।
कचरा पृथक्करण क्यों है जरूरी?
दरअसल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर की स्वच्छता का सबसे मजबूत आधार सोर्स सेग्रीगेशन, यानी घर से ही कचरे को अलग-अलग करना है। जब गीला और सूखा कचरा अलग निकलता है तो उसका निपटान आसान हो जाता है। गीले कचरे से खाद बनाई जा सकती है, जबकि प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच जैसे सूखे कचरे का दोबारा इस्तेमाल संभव होता है। इससे लैंडफिल पर दबाव कम पड़ता है, प्रदूषण घटता है और नगर निगम की लागत भी कम होती है। इंदौर पिछले कई वर्षों से इसी मॉडल पर काम कर रहा है, जिसकी वजह से उसे लगातार स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता मिली है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने शहरवासियों से अपील की है कि वे 30 जुलाई को अपने घर या प्रतिष्ठान में कचरा अलग-अलग रखकर सेल्फी लें और इस ऐतिहासिक अभियान का हिस्सा बनें। उनका कहना है कि यह सिर्फ रिकॉर्ड बनाने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ शहर बनाने की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। यदि लक्ष्य के अनुसार पांच लाख लोग इस अभियान में शामिल होते हैं, तो इंदौर एक बार फिर स्वच्छता के क्षेत्र में देश के सामने नई मिसाल पेश करेगा।






