कानूनी झंझटों के डर से जहां लोग सड़क हादसों के पीड़ितों की मदद करने से हिचकते हैं, वहीं इंदौर के दो नागरिकों ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। इन दोनों ने अलग-अलग घटनाओं में घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई। अब उनके इस नेक काम के लिए केंद्र सरकार की ‘राहवीर योजना 2025’ के तहत पहली बार इंदौर में उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय मूल्यांकन समिति की बैठक में सूरज विश्वकर्मा और निलेश गौर को ‘राहवीर’ के रूप में चुना गया है। दोनों को 25-25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि के साथ प्रशस्ति पत्र भी मिलेगा। समिति ने अपनी अनुशंसा परिवहन आयुक्त को भेज दी है।
कैसे हुआ ‘राहवीरों’ का चयन?
एआरटीओ अर्चना मिश्रा ने बताया कि ‘राहवीर योजना’ के तहत जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में एक मूल्यांकन समिति गठित है। इसमें पुलिस आयुक्त/एसएसपी, सीएमएचओ और आरटीओ सदस्य होते हैं। यह समिति पुलिस और अस्पताल से मिले प्रकरणों की गहन समीक्षा करती है। पात्र पाए जाने पर मददगार नागरिक का विवरण e-DAR पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, जिसके बाद प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेज दी जाती है। इन दोनों मामलों में यह पाया गया कि घायलों की जान ‘गोल्डन ऑवर’ में मिली मदद की वजह से बची।
इन दो मददगारों ने पेश की मिसाल
पहले राहवीर: सूरज विश्वकर्मा
लसूड़िया थाना क्षेत्र में 20 जून 2025 को संजय कुरोची एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। न्याय नगर निवासी सूरज पिता हीरालाल विश्वकर्मा ने बिना देर किए उन्हें उठाया और तुरंत अरबिंदो अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर संजय को समय पर इलाज नहीं मिलता तो उनकी जान बचाना मुश्किल था।
दूसरे राहवीर: निलेश गौर
बाणगंगा थाना क्षेत्र में 19 जून 2025 को कमलाकेशर नगर निवासी नितेश पिता मधुकर का रिक्शा पलट गया था, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। पास में मौजूद रामनगर निवासी निलेश गौर ने तत्काल उन्हें अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया। गोल्डन ऑवर में मदद मिलने से नितेश की हालत स्थिर हो सकी।
प्रशासन की अपील: डरें नहीं, मदद करें
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आएं। एआरटीओ राजेश गुप्ता ने कहा, “राहवीर योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मददगार नागरिकों को सम्मान और पहचान देने की एक पहल है। दुर्घटना देखकर पीछे न हटें। गोल्डन ऑवर में मदद करके आप किसी की जान बचा सकते हैं और सम्मान भी पा सकते हैं।”
“दुर्घटना देखकर पीछे न हटें। गोल्डन ऑवर में मदद करें, जान बचाएं और सम्मान पाएं।” — राजेश गुप्ता, एआरटीओ
योजना के नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति एक साल में अधिकतम पांच मामलों में पुरस्कार के लिए पात्र हो सकता है। यदि किसी घायल की मदद दो लोग मिलकर करते हैं, तो प्रोत्साहन राशि दोनों में बराबर बांट दी जाती है।





