इंदौर: नवरात्रि से पहले गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर का बड़ा बयान सामने आया है। उनका दावा है कि हर साल गरबों में करीब साढ़े चार लाख हिंदू लड़कियां विधर्मियों के साथ भाग जाती थीं और ऐसी लड़कियां अगले साल करीब 9 लाख बच्चों को जन्म देती थीं। इससे डेमोग्राफिक परिवर्तन हो रहा था, जिस पर अब रोक लगाई गई है।
गरबा पंडालों में आने वालों की पहचान को लेकर भी उषा ठाकुर ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि कुछ लोग तिलक लगाकर और कलावा बांधकर अपनी पहचान छिपाते हुए गरबा पंडालों में प्रवेश करते हैं। ऐसे लोगों पर हिंदू बेटियों को भ्रमित कर उनका जीवन खराब करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने गरबा में प्रवेश से पहले पहचान की जांच करने की बात कही।
मूर्ति पूजा नहीं करने वालों की एंट्री पर रोक की मांग
गरबा पंडालों में मूर्ति पूजा नहीं करने वालों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए उषा ठाकुर ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की मुहिम का समर्थन किया। उनके मुताबिक गरबा शक्ति की साधना के साथ शस्त्र और शास्त्र का पर्व है। इसे आधुनिक कपड़ों, गहनों और टैटू के प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
गरबा में पहचान को लेकर पहले भी दे चुकी हैं बयान
गरबा पंडालों में प्रवेश करने वालों की पहचान को लेकर उषा ठाकुर पहले भी बयान दे चुकी हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने गरबा आयोजकों से प्रवेश के समय पहचान पत्र देखने की अपील की थी। उस समय भोपाल के कई गरबा आयोजकों ने पहचान पत्र देखकर प्रवेश देने की व्यवस्था लागू करने की बात कही थी।
गरबा में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर नवरात्रि से पहले मध्य प्रदेश में सियासी बयान लगातार सामने आ रहे हैं। इससे पहले भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने मुस्लिम युवकों से गरबा में आने पर अपनी बहन-बेटियों को साथ लाने की बात कही थी। मंत्री विश्वास सारंग भी गरबा को मनोरंजन नहीं, बल्कि मां दुर्गा की आराधना बता चुके हैं। इसी बहस के बीच अब उषा ठाकुर ने पहचान छिपाकर गरबा में आने वालों की जांच और मूर्ति पूजा नहीं करने वालों की एंट्री रोकने की मांग की है।





