अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच ईरान को एक और बड़ा झटका लगने वाला है। यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य बल, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित करने का फैसला किया है। इस कदम से IRGC, अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे संगठनों की सूची में शामिल हो जाएगा।
पहले इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे फ्रांस ने भी अब अपना रुख बदल लिया है, जिससे इस फैसले को लागू करने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। इस निर्णय के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
फ्रांस के यू-टर्न से बदला समीकरण
शुरुआत में फ्रांस इस कदम का विरोध कर रहा था। उसे डर था कि इससे ईरान में फंसे फ्रांसीसी नागरिकों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है और बातचीत के रास्ते बंद हो सकते हैं। लेकिन, अब फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे बड़े यूरोपीय देश पहले से ही इसके पक्ष में थे।
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट ने कहा, “ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर जो असहनीय दमन हुआ है, उसका जवाब देना जरूरी है। इन अपराधों के लिए कोई माफी नहीं हो सकती।” फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने भी इस फैसले के समर्थन की पुष्टि की है।
क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?
ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान IRGC पर मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगे हैं। यूरोपीय कमीशन की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने बताया कि IRGC ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान 6,373 लोगों की हत्या की है।
“अगर आप आतंकवादी की तरह काम करते हैं तो आपके साथ आतंकवादी की तरह ही व्यवहार किया जाना चाहिए।” — काजा कल्लास, उपाध्यक्ष, यूरोपीय कमीशन
इस प्रस्ताव को कानून बनने के लिए यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों का समर्थन आवश्यक है। फ्रांस के समर्थन के बाद अब यह औपचारिकता पूरी होने की उम्मीद है।
कितनी ताकतवर है IRGC?
IRGC ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य शाखा है, जिसका गठन 1979 में इस्लामिक क्रांति की रक्षा के लिए अयातुल्ला खुमैनी ने किया था। यह ईरान की नियमित सेना से अलग काम करती है और सीधे देश के सर्वोच्च नेता को रिपोर्ट करती है।
IRGC का ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर गहरा प्रभाव है। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश पहले ही इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं।
ईरान पर क्या होगा असर?
EU द्वारा आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बाद IRGC के सदस्यों के यूरोपीय देशों में प्रवेश पर प्रतिबंध लग सकता है। इसके अलावा, यूरोप में मौजूद उनकी संपत्तियों को भी फ्रीज किया जा सकता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान रूस के करीबी सहयोगी के तौर पर पश्चिमी देशों के निशाने पर है। इस कदम से ईरान पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव काफी बढ़ जाएगा।





