पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच भारत ने सोमवार, 2 मार्च को उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क बढ़ाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस व प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से अलग-अलग फोन पर बात की।
इन वार्ताओं का केंद्र क्षेत्र में जारी हमले और उनका असर रहा। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों पर हुए ईरानी हमलों की निंदा की और वहां रह रहे भारतीय समुदाय की स्थिति पर विस्तार से जानकारी ली। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और मौजूदा हालात में उनकी सुरक्षा प्राथमिक चिंता बनी हुई है।
भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर फोकस
बहरीन और सऊदी अरब में लाखों भारतीय नागरिक रोजगार से जुड़े हैं। तनाव बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर अनिश्चितता और आशंका का माहौल बना है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने दोनों नेताओं से भारतीय नागरिकों की कुशलता के बारे में चर्चा की, ताकि किसी भी सैन्य या सुरक्षा परिस्थिति का सीधा असर भारतीयों पर न पड़े।
सूत्रों के मुताबिक, क्षेत्रीय संघर्ष के फैलने की आशंका ने आम लोगों के साथ प्रवासी समुदाय की चिंताएं भी बढ़ाई हैं। ईरानी जवाबी हमलों की खबरों के बाद खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों के बीच दहशत का माहौल बताया जा रहा है। भारत सरकार की ओर से शीर्ष स्तर पर लगातार संपर्क इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यूएई नेतृत्व से भी एक दिन पहले हुई थी बातचीत
इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से भी फोन पर बात की थी। उस बातचीत में यूएई पर हुए ईरानी हमलों की निंदा की गई थी और जानमाल के नुकसान पर शोक व्यक्त किया गया था।
“भारत उनके साथ एकजुटता के साथ खड़ा है।”- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (यूएई राष्ट्रपति से बातचीत के संदर्भ में)
रविवार की बातचीत में भी खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और स्थिति पर चिंता जताई गई थी। सोमवार को बहरीन और सऊदी नेतृत्व से संवाद को उसी कूटनीतिक क्रम का विस्तार माना जा रहा है।
28 फरवरी के बाद क्यों बढ़ा तनाव
क्षेत्रीय परिदृश्य 28 फरवरी के बाद और अस्थिर हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त हमलों में ईरान को निशाना बनाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई अन्य वरिष्ठ हस्तियां मारी गईं। इसके बाद तेहरान की ओर से जोरदार पलटवार किया गया और कई देशों को निशाना बनाया गया, जिसकी खाड़ी देशों ने कड़ी निंदा की है।
इस पृष्ठभूमि में भारत की प्राथमिकता दो स्तरों पर दिख रही है-पहला, पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में निरंतर संवाद; दूसरा, वहां मौजूद भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर प्रत्यक्ष निगरानी। बहरीन, सऊदी अरब और यूएई के शीर्ष नेतृत्व से 48 घंटे के भीतर हुई बातचीत इसी रणनीति का संकेत देती है।
फिलहाल क्षेत्र में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। भारत की कूटनीतिक सक्रियता का तत्काल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बढ़ते टकराव के बीच भारतीय नागरिक सुरक्षित रहें और प्रभावित देशों के साथ समन्वय बना रहे।






