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“महिला आरक्षण बिल भाजपा की बांटने वाली राजनीति का ‘काला कागज’..” अखिलेश यादव का बड़ा बयान, लगाए गंभीर आरोप

Written by:Shyam Dwivedi
Last Updated:
समाजवादी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को लेकर भाजपा पर जमकर हमला बोला है और गंभीर आरोप लगाए हैं। अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल को भाजपा की बांटने वाली राजनीति का ‘काला कागज’ बताया है। साथ ही भाजपा पर संशोधन के नाम पर जल्दबाजी करने का आरोप लगाया है।
“महिला आरक्षण बिल भाजपा की बांटने वाली राजनीति का ‘काला कागज’..” अखिलेश यादव का बड़ा बयान, लगाए गंभीर आरोप

लोकसभा में गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से तीन अहम बिल (महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026) पेश किए गए हैं। जिसको लेकर सदन में कई दलों के सांसदों ने अपना चर्चा में भाग लिया। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में संबोधित कर सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से बिल के लिए समर्थन मांगा है। वहीं सपा प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने भी महिला आरक्षण बिल और परिसीमन विधेयक को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है।

अखिलेश यादव ने स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण बिल का समर्थन करती है लेकिन भाजपाई चालबाजी के खिलाफ है। इतना ही नहीं उन्होंंनें सरकार पर आधी आबादी में मुस्लिम महिलाओं को नहीं गिनने का आरोप लगाते हुए कहा, हमारी मांग है कि आधी आबादी में पिछड़े और मुस्लिम महिलाओं को भी शामिल किया जाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का असली लक्ष्य वोट हासिल करना और सत्ता में बने रहना है, इसलिए ये विधेयक लाए गए हैं।

अखिलेश यादव का भाजपा पर महिला आरक्षण बिल के दुरुपयोग का आरोप

अखिलेश यादव ने आगे कहा, भाजपा तथाकथित महिला आरक्षण बिल का इस्तेमाल महिलाओं को सिर्फ नारों में बदलने के बहाने के तौर पर कर रही है, क्योंकि महिलाएं पहले ही महिला असुरक्षा, महिलाओं के खिलाफ़ हिंसा और अपराध में बेतहाशा बढ़ोतरी, महंगाई, बेरोजगारी, बीमारी और अशिक्षा के कारण भाजपा से दूर हो चुकी हैं। भाजपा सदस्यों और उनके साथियों की पिछड़ी, छोटी सोच और दुनिया को देखने का नजरिया नए जमाने की महिला शक्ति को मंजूर नहीं है, जो महिलाओं की आजादी के खिलाफ खड़ी है। उन्होंने कहा, यह बिल भी महिलाओं के हक छीनने के लिए एक छिपे हुए रूप में आया है। इस बिल के बारे में हमारे सवाल और शक विरोध नहीं हैं बल्कि, वे महिलाओं के हक की रक्षा और उन्हें मजबूत बनाने के लिए खींची जा रही सकारात्मक ‘लक्ष्मण रेखा’ हैं।

महिला आरक्षण बिल को लेकर सपा सांसद का तीखा आरोप

सपा सांसद ने कहा, महिला आरक्षण बिल ‘पिछड़े, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक’ समुदायों की सभी महिलाओं के खिलाफ है क्योंकि यह महिलाओं को आपस में बांटने की साजिश है। यह महिलाओं को अधिकार देने के बारे में नहीं है, बल्कि आज उनकी ताकत को बांटने और बहुत कमजोर करने और कल उनका हक छीनने की एक धोखेबाजी वाली योजना है।

उन्होंने आगे कहा कि आजादी से पहले देश का बंटवारा करने में भाजपा के पुराने सोच वाले लोगों ने अंडरग्राउंड भूमिका निभाई, और फिर उनके साथियों ने आज़ादी के बाद भी नफरत के नाम पर समाज के भाईचारे, शांति और सद्भाव को बांटने के ‘बुरे काम’ जारी रखे। अब ये बुरे लोग, अपनी महिला-विरोधी सामंती सोच से प्रेरित होकर, देश की ‘आधी आबादी’– मतलब महिलाओं– की ताकत को बांटने और हमेशा के लिए दबाने की साज़िश कर रहे हैं, ताकि आज की जागरूक महिलाओं की विरोध करने की क्षमता टूट जाए, कम हो जाए और मिट जाए।

महिला आरक्षण बिल भाजपा की बांटने वाली राजनीति का ‘काला कागज’- अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल को भाजपा की बांटने वाली राजनीति का ‘काला कागज’ करार दिया है। जिन्होंने अपने संगठनों में महिलाओं को इज्जत और सम्मान नहीं दिया, वे उन्हें राजनीति में क्या जगह देंगे? अगर हम पिछड़े वर्गों की आबादी को कम से कम सिर्फ़ 66% मानें, तो ‘उस आबादी का आधा हिस्सा- मतलब औरतें-33% होंगी। क्योंकि कोई भी उनके अधिकारों की बात नहीं कर रहा है, इसका मतलब है कि यह बिल 33% औरतों को अधिकार देने के लिए नहीं, बल्कि उनसे उनके अधिकार छीनने के लिए लाया जा रहा है। यह भाजपा और उनकी हावी, औरत विरोधी सामंती सोच की साज़िश है, जिसके खिलाफ हम विरोध करते रहेंगे। भले ही इसमें ‘सालों या सदियां’ लग जाएं। असल में, वे 33% औरतों को आरक्षण नहीं दे रहे हैं, बल्कि 33% औरतों से रिज़र्वेशन छीन रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, हम बिल के खिलाफ नहीं हैं, सिर्फ उनके शोषण करने वाले तरीके के खिलाफ हैं, जिसका इरादा गलत है। अगर कुछ करने के पीछे कोई सच्चा इरादा है, तो शक की कोई गुंजाइश नहीं है। असल में, यह हार की घबराहट में उठाया गया जल्दबाजी का कदम है, जिसके पीछे कोई तैयारी नहीं है। इस बिल को लेकर हमारे बीच गुस्सा इसलिए है क्योंकि इसका प्रोसेस ही गलत है। इस बिल में कमी इसलिए है, क्योंकि भाजपा की नज़र में इसका मतलब सिर्फ़ वोट है।

सपा सांसद का संशोधन प्रक्रिया और लोकतंत्र पर साजिश का दावा

सपा सांसद ने कहा, असल में महिला आरक्षण बिल की बुनियाद ही बेबुनियाद है। अगर आरक्षण का आधार कुल सीटों का 1/3 (एक-तिहाई) है, तो इसका मतलब है कि यह मैथ का मामला है, और मैथ का आधार नंबर, आंकड़े हैं- कोई आसमानी बातें नहीं। और ऐसे मामलों में, नंबर का आधार आबादी है, जिसका आधार जनगणना है। जब 2011 के पुराने डेटा को महिलाओं की आबादी का आधार बनाया जाएगा, तो महिला आरक्षण की बुनियाद ही गलत हो जाएगी। जब मिट्टी में ही कमी होगी, तो असली फसल कैसे उग सकती है? जब गिनती ही गलत है, तो आरक्षण सही कैसे हो सकता है?

अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने भाजपा पर संशोधन के नाम पर जल्दबाजी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, असल में भाजपा वालों का जनगणना कराने से बचने का इरादा है, क्योंकि अगर जनगणना हुई, तो उन्हें जाति-आधारित डेटा और जाति-आधारित आरक्षण भी देना होगा। यह भाजपा की एक बहुत बड़ी साज़िश है, जिसमें जनगणना के आधार पर सीमांकन को खारिज करके पिछड़ी, दलित, अल्पसंख्यक और आदिवासी महिलाओं के हक लूटे जा रहे हैं। ‘सो-कॉल्ड विमेंस रिज़र्वेशन बिल’ महिलाओं और डेमोक्रेसी के खिलाफ़ कुछ लोगों का एक सीक्रेट प्लान है, जो तब तक मंज़ूर नहीं होगा जब तक इस प्रोसेस में सुधार नहीं किए जाते।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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