मध्य-पूर्व में तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है, जहां ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की एक कथित अमेरिकी-इजराइली हमले में मौत हो गई है। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसियों, तसनीम और फार्स ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि हमले में खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद, बहू और पोती की भी जान चली गई है। इस घटना के बाद पूरे देश में 40 दिनों के राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा कर दी गई है।
खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने एक बयान जारी किया है। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, IRGC ने कहा, ‘हमने एक महान नेता खो दिया है और पूरा देश शोक में है।’ बयान में आगे चेतावनी दी गई कि जल्द ही सबसे खतरनाक जवाबी अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
हमले और ईरान का पलटवार
यह घटनाक्रम तेहरान और ईरान के कई अन्य बड़े शहरों पर हुए सिलसिलेवार हमलों के बाद सामने आया है। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के मुताबिक, इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 740 से अधिक घायल हुए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, एक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में 85 छात्राओं की भी मौत हुई।
इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी बड़े पैमाने पर पलटवार किया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने इजराइल पर लगभग 400 मिसाइलें दागीं। इसके अलावा, ईरान ने कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और UAE में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। ईरान के हमलों की जद में दुबई का पाम होटल एंड रिसॉर्ट और बुर्ज खलीफा के पास का इलाका भी आया, जहां ड्रोन से हमला किया गया।
कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई?
अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद के एक धार्मिक परिवार में हुआ था। वह 1979 की इस्लामी क्रांति के प्रमुख चेहरों में से एक थे और अयातुल्ला खोमैनी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। 1981 में वह ईरान के राष्ट्रपति बने और 1989 में खोमैनी के निधन के बाद उन्हें देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ चुना गया। उनके समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का रक्षक मानते थे, जबकि आलोचक उन पर कट्टरपंथी शासन चलाने का आरोप लगाते थे।
ट्रंप ने किया मौत का दावा
इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर खामेनेई की मौत का दावा किया। उन्होंने लिखा, “इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक खामेनेई मारा गया। यह ईरान की जनता के साथ-साथ अमेरिका और दुनियाभर के लिए न्याय है।”
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच यह टकराव कई दशकों से चल रहा है, जिसके केंद्र में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलें और मध्य-पूर्व में उसका बढ़ता प्रभाव जैसे मुद्दे रहे हैं। खामेनेई की मौत के बाद इस क्षेत्र में एक बड़े और विनाशकारी युद्ध की आशंका बढ़ गई है।






