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27 प्रतिशत OBC आरक्षण मामला, आज से हाई कोर्ट में फिर शुरू होगी सुनवाई, आ सकता है बड़ा अपडेट

Written by:Atul Saxena
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सरकारी भर्तियों में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला लंबे समय से न्यायालय में चल रहा है सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चलने के बाद अब एक बार फिर सभी याचिकाएं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में ट्रांसफर हो गई है जिसपर आज से सुनवाई शुरू हो रही है।
27 प्रतिशत OBC आरक्षण मामला, आज से हाई कोर्ट में फिर शुरू होगी सुनवाई, आ सकता है बड़ा अपडेट

Jabalpur HC

मध्य प्रदेश का चर्चित 27 प्रतिशत प्रतिशत आरक्षण मामला एक बार फिर चर्चा में है, इस मामले में आज से हाई कोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू होगी, आरक्षण सम्बन्धी सभी याचिकाएं सितम्बर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर हो गई थी जहाँ मामले की सुनवाई चल रही थी लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन सभी य्चिकाओं को एक बार फिर हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच 17 महीने बाद एक बार फिर से 27 प्रतिशत आरक्षण मामले की फिर से सुनवाई करेगा, आज सोमवार 23 मार्च से इस पर फिर सुनवाई शुरू होगी , बताया जा रहा है कि आज लंच ले बाद इसे लिस्ट किया गया है, 27 प्रतिशत आरक्षण से जुडी सभी 10 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने वापस भेज दी ओबीसी आरक्षण संबंधी याचिकाएं     

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़कर 27% करने की विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित मामलों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट वापस भेज दिया है। 21 फरवरी 2026 सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जारी किए गए आदेश के बाद आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आरक्षण से संबंधित सभी याचिकाओं पर सुनवाई शुरू होगी।

SC के निर्देश पर हाई कोर्ट की स्पेशल बेंच में होगी सुनवाई 

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा से कहा था कि आरक्षण मामले को गंभीरता से देखते हुए एक विशेष बेंच गठित की जाए। यह बेंच तीन माह के भीतर सभी विवादों का अंतिम निपटारा करेगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरक्षण नीति की वैधता की जांच संबंधित राज्य की सामाजिक संरचना के आधार पर होनी चाहिए और इसके लिए हाई कोर्ट ही उपयुक्त मंच है।

कुल आरक्षण बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया था  

उल्लेखनीय है कि कमलनाथ सरकार में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का ऑर्डिनेंस लाया गया था और बाद में ऑर्डिनेंस को कानून भी बनाया गया, कानून आने के बाद प्रदेश में आरक्षण का कुल प्रतिशत 64 प्रतिशत हो गया था, इसके बाद अनारक्षित वर्ग की छात्रा आशिता दुबे ने हाई कोर्ट में इस कानून को चुनौती दी थी।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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