जबलपुर के गौर क्षेत्र में लकड़ी की टाल की आड़ में संचालित की जा रही अवैध आरा मशीन पर वन विभाग की टीम द्वारा छापामार कार्रवाई की गई। देर रात एसडीओ और रेंजर के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची तो देखा कि आरा मशीन संचालित की जा रही है।
जांच करने पर मौके से बड़ी संख्या में आम और शीशम सहित कई लकड़ियां बरामद हुई। जब दस्तावेज मांगे गए तो नहीं मिल पाए, जिसके चलते टाल को सील कर दिया गया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है। चलिए पूरा मामला जान लेते हैं।
टाल का है लाइसेंस मशीन का नहीं
इस बारे में वन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक टाल संचालक के पास लकड़ी की टाल संचालित करने का लाइसेंस है। जिसके तहत वह लकड़ियों का भंडारण और बिक्री कर सकता है लेकिन चिराई के लिए आरा मशीन संचालित करने की अनुमति नहीं थी। छापे के दौरान जब अधिकारियों द्वारा मशीन से संबंधित दस्तावेज मांगे गए तो संचालक उन्हें प्रस्तुत नहीं कर सका। जबकि पहले उसने दस्तावेज होने का दावा किया था लेकिन वह अधूरे कागज ही दिखा पाया।
टाल को किया गया सील
वन विभाग की टीम ने संचालक द्वारा बोले जाने के बाद बहुत देर तक मशीन संबंधित दस्तावेजों के आने का इंतजार किया। जब दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो लंबे समय से आरा मशीन संचालित किए जाने की आशंका के आधार पर पंचनामा तैयार किया गया और टाल सील कर दी गई।
टाल को सील करने के बाद अब जांच शुरू कर दी गई है। यहां जो काष्ठ रखा हुआ है उसकी जांच के साथ यह पता लगाया जा रहा है कि लकड़ियों के दस्तावेज वैध हैं या नहीं। जांच पूरी होने के बाद आगे की वैधानिक करवाई की जाएगी।
शिकायत पर हुई कार्रवाई
वन विभाग के एसडीओ आकाश साहू द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक गौर क्षेत्र में संचालित की जा रही इस टाल में अनियमितताओं की शिकायत लंबे समय से मिल रही थी। डीएफओ पुनीत सोनकर के निर्देश पर टीम गठित कर जब निरीक्षण किया गया तो आरा मशीन का वैध लाइसेंस नहीं मिला। इसके बाद काष्ठ अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।






