मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने चर्चित 52 किलो सोना और करीब ₹11 करोड़ नकद बरामदगी मामले में गिरफ्तार पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा को नियमित जमानत दे दी है। फरवरी 2025 से जेल में बंद सौरभ शर्मा को करीब 18 महीने बाद राहत मिली है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 10 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहाई के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने इन आधारों पर दी राहत
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच एजेंसी चार्जशीट पेश कर चुकी है। ट्रायल कोर्ट आरोप भी तय कर चुका है, इसलिए आगे की जांच के लिए आरोपी को जेल में रखने की जरूरत नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि मामले में बड़ी संख्या में गवाह और दस्तावेज हैं, ऐसे में मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना कम है।
18 महीने से जेल में, अधिकतम सजा 7 साल
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सौरभ शर्मा करीब 18 महीने से न्यायिक हिरासत में है, जबकि जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है। केवल ट्रायल लंबा चलने के आधार पर किसी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
ये शर्तें भी लगाईं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। सौरभ शर्मा को ट्रायल कोर्ट की हर सुनवाई में उपस्थित रहना होगा। वह किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा, न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा। इसके अलावा अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा भी नहीं कर सकेगा।
पहले दो बार खारिज हो चुकी थी जमानत
इससे पहले सौरभ शर्मा की नियमित जमानत याचिका दो बार खारिज हो चुकी थी। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट भी गया, जहां से याचिका वापस लेकर दोबारा आवेदन करने की छूट मिली। बाद में पत्नी की बीमारी का हवाला देते हुए फिर से जमानत मांगी गई, लेकिन 10 जून 2026 को हाईकोर्ट ने आवेदन खारिज कर दिया था। इस बार सुनवाई के दौरान ईडी ने भी जमानत का विरोध करते हुए आशंका जताई कि रिहा होने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। हालांकि, अदालत ने तय शर्तों के साथ जमानत मंजूर कर ली।
जबलपुर से वंदना झा की रिपोर्ट






