जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की समस्याएं लेकर पहुंचे छात्र नेताओं और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद के दौरान कर्मचारियों ने छात्र नेताओं के साथ मारपीट की। हैरानी की बात यह है कि यह घटना कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा के सामने हुई। घटना को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की बात भी सामने आई है। पीड़ित छात्रों का आरोप है कि कर्मचारियों ने उनके साथ गाली-गलौज की और उन्हें घेरकर मारपीट की। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान कुलगुरु ने कर्मचारियों को रोकने का प्रयास नहीं किया। विवाद के बाद दोनों पक्षों ने सिविल लाइन थाने में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
घटनाक्रम के अनुसार, एमपीएसयू के अध्यक्ष अभिषेक पांडे कुछ छात्राओं के साथ कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे थे। छात्र नेता छात्र अंकुर जैन की डिग्री से जुड़ी समस्या कुलगुरु के सामने रखने पहुंचे थे। अंकुर पिछले छह महीने से अपनी डिग्री के लिए परेशान हो रहा था। इसके अलावा बीएसडब्ल्यू द्वितीय वर्ष के छात्र नमन शर्मा की परीक्षा नहीं होने और अन्य छात्र समस्याओं को लेकर भी कुलगुरु से बातचीत की गई। बातचीत खत्म होने के बाद छात्र नेता कार्यालय से बाहर आ गए। इसी दौरान विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर कर्मचारी अपनी 36 सूत्रीय मांगों को लेकर पहले से धरने पर बैठे थे।
कर्मचारियों ने आंदोलन में समर्थन मांगा
अभिषेक पांडे के मुताबिक, धरने पर बैठे कर्मचारियों ने छात्र नेताओं से अपने आंदोलन को समर्थन देने के लिए कहा। इसके बाद छात्र नेता ने माइक हाथ में लिया और कर्मचारियों की मांगों पर जल्द विचार करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से चल रहे धरने के कारण आम छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसी दौरान छात्र नेताओं ने कुलगुरु की शैक्षणिक योग्यता और एक महिला अधिकारी से अभद्रता से जुड़े न्यायालय में चल रहे मामलों का हवाला देते हुए कुलगुरु से इस्तीफे की मांग कर दी।
इस्तीफे की मांग के बाद बढ़ा विवाद
कुलगुरु के इस्तीफे की मांग सुनते ही वहां मौजूद कुलगुरु के समर्थक कर्मचारियों और छात्र नेताओं के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और गाली-गलौज के बाद दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। घटना को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित होने की बात सामने आई है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। विवाद के दौरान दोनों पक्षों में हाथापाई हुई और परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। हालांकि, धरने पर बैठे कुछ अन्य कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर विवाद को शांत कराने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक स्थिति बिगड़ चुकी थी।
NSUI ने कुलगुरु की नियुक्ति पर उठाए सवाल
दूसरी तरफ, एनएसयूआई ने कुलगुरु राजेश वर्मा की नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि राजेश वर्मा की कुलगुरु पद पर नियुक्ति नियमों के खिलाफ की गई है और उन्होंने पैसे के बल पर यह पद हासिल किया है। एनएसयूआई ने इस नियुक्ति को शैक्षणिक और नैतिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। प्रबंधन का कहना है कि कुलगुरु की नियुक्ति शासकीय अधिनियम, यूजीसी के नियमों और राज्यपाल के आदेश के तहत हुई है। यदि किसी को नियुक्ति पर आपत्ति है तो वह हाईकोर्ट या राज्यपाल के सामने अपनी शिकायत रख सकता है। फिलहाल सिविल लाइन थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतें लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।






