जबलपुर ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। दरअसल शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन और रखरखाव अब जबलपुर नगर निगम करेगा। अदालत ने साफ कहा है कि ट्रैफिक जाम कम करने, बंद पड़े सिग्नलों को चालू करने और अतिक्रमण हटाने के लिए सभी विभाग मिलकर काम करें, ताकि लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिल सके।
दरअसल जबलपुर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की दिशा में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला अहम माना जा रहा है। लंबे समय से खराब पड़े ट्रैफिक सिग्नलों और बढ़ते जाम को देखते हुए कोर्ट ने नगर निगम को सभी सिग्नलों की जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए हैं। इससे अलग-अलग विभागों के बीच जिम्मेदारी तय होगी और रखरखाव में तेजी आने की उम्मीद है।
शहर के कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लंबे समय से ठीक तरह काम नहीं कर रहे थे। इससे रोजाना हजारों लोगों को जाम, दुर्घटना के खतरे और समय की बर्बादी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इसी मुद्दे को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रशासन को ठोस व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है।
जबलपुर ट्रैफिक सिग्नल की जिम्मेदारी नगर निगम को क्यों सौंपी गई?
वहीं मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने की। अदालत के सामने बताया गया कि शहर के कई ट्रैफिक सिग्नल या तो बंद हैं या फिर सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। इससे यातायात प्रभावित हो रहा है और सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार ने कोर्ट में 27 जुलाई 2026 को हुई संयुक्त बैठक की कार्यवाही पेश की, जिसमें कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) शामिल हुए थे। बैठक में तय किया गया कि शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन और रखरखाव नगर निगम करेगा। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड प्रत्येक ट्रैफिक सिग्नल के रखरखाव के लिए नगर निगम को सालाना 1.50 लाख रुपये उपलब्ध कराएंगे। इससे रखरखाव के लिए तय बजट और स्पष्ट जवाबदेही दोनों सुनिश्चित होंगी।
हाईकोर्ट के निर्देश से ट्रैफिक व्यवस्था में क्या बदलाव आएगा?
दरअसल हाईकोर्ट ने केवल सिग्नलों की जिम्मेदारी तय करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि शहर की पूरी ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने पर भी जोर दिया। अदालत ने निर्देश दिए कि जहां अतिक्रमण, अवैध पार्किंग या अन्य कारणों से यातायात बाधित हो रहा है, वहां तुरंत कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को सुचारु यातायात उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।






