जबलपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक शख्स ने नकली सोने के जेवर गिरवी रखकर बैंक से लाखों रुपये का लोन ले लिया और लंबे समय तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह सिर्फ एक साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी चाल थी।

इस जबलपुर बैंक फ्रॉड ने लोगों के मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि आखिर बैंक की जांच प्रक्रिया कितनी मजबूत है। जब नकली ज्वेलरी को असली मानकर लोन दे दिया गया, तो यह सिस्टम की एक बड़ी चूक को दिखाता है।

कैसे हुआ पूरा जबलपुर बैंक फ्रॉड

यह मामला जबलपुर के सिविल लाइंस स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा का है। यहां भीमनगर निवासी सौरभ चौधरी ने जून 2023 में बैंक से एग्रीकल्चर टर्म लोन लिया था। शुरुआत में उसने 3 लाख 73 हजार रुपये का लोन लिया और उसे समय पर चुका भी दिया।

इसके बाद उसने दो और बड़े लोन लिए एक 4 लाख 79 हजार 500 रुपये और दूसरा 8 लाख 78 हजार 500 रुपये का। इन दोनों लोन के बदले उसने सोने के जेवर गिरवी रखे। यहीं से असली खेल शुरू हुआ। जिन जेवरों को असली सोना बताया गया, वे दरअसल नकली थे। लेकिन उस समय किसी को इसका अंदाजा नहीं हुआ।

ज्वेलर्स की मिलीभगत से हुआ फर्जीवाड़ा

बैंक ने नियम के अनुसार जेवरों की जांच कराने के लिए स्थानीय ज्वेलर्स की मदद ली। घमापुर के सिद्धेश्वरी ज्वेलर्स और सराफा बाजार के सौम्या ज्वेलर्स के संचालकों ने इन जेवरों को असली बताया।

इस जबलपुर फर्जी लोन केस में यहीं सबसे बड़ा मोड़ आया। बाद में जांच में सामने आया कि इन दोनों ज्वेलर्स की भी इस पूरे मामले में भूमिका थी। उनके साथ अचिन उरमलिया नामक व्यक्ति भी इस फर्जीवाड़े में शामिल था। यानी यह कोई एक व्यक्ति का काम नहीं था, बल्कि एक पूरा नेटवर्क मिलकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था।

दो साल बाद कैसे खुला पूरा मामला

इस जबलपुर बैंक धोखाधड़ी का खुलासा फरवरी 2025 में हुआ। जब भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय से निरीक्षण टीम बैंक की जांच के लिए पहुंची, तो वरिष्ठ प्रबंधक धीरज कुमार को जेवरों पर शक हुआ। उन्होंने दोबारा जांच कराने का फैसला लिया। जब अधिकृत ज्वेलर से परीक्षण कराया गया, तो सच्चाई सामने आ गई जेवर पूरी तरह नकली थे। इसके बाद बैंक ने तुरंत शिकायत दर्ज कराई और मामला आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) तक पहुंचा। जांच के बाद चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।

EOW की कार्रवाई और आगे की जांच

ईओडब्ल्यू ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। इसमें मुख्य आरोपी सौरभ चौधरी के साथ दो ज्वेलर्स और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।