झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी 14 जनवरी को अपने नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा करेगी, जिसके लिए नामांकन की प्रक्रिया 13 जनवरी को पूरी की जाएगी। इस दौड़ में पार्टी के मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू का नाम सबसे आगे चल रहा है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी बाबूलाल मरांडी संभाल रहे हैं, जो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं।
झारखंड बीजेपी की ओर से जारी चुनावी कार्यक्रम के अनुसार, 13 जनवरी को दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे। उसी दिन दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। शाम 5 बजे तक नाम वापस लेने का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद 14 जनवरी को दोपहर 2 बजे नए अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो मतदान भी कराया जाएगा।
जिलाध्यक्षों का चुनाव संपन्न
प्रदेश अध्यक्ष का यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब पार्टी ने हाल ही में अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत किया है। इससे पहले 9 जनवरी को बीजेपी ने झारखंड के 23 सांगठनिक जिलों के लिए नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों की सूची जारी की थी। प्रदेश चुनाव अधिकारी और सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने जानकारी दी कि यह चुनाव प्रक्रिया “संगठन पर्व” के तहत पूरी की गई, जिसकी शुरुआत विधानसभा चुनावों के बाद हुई थी।
घोषित सूची के अनुसार, रांची महानगर में वरुण साहू, धनबाद महानगर में श्रवण राय, और हजारीबाग में विवेकानंद सिंह को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, दुमका में रूपेश मंडल, पलामू में अमित तिवारी और चाईबासा में गीता बालमुचू को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक संतुलन पर जोर
डॉ. प्रदीप वर्मा ने बताया कि संगठन का विस्तार करते हुए रांची ग्रामीण को पूर्वी और पश्चिमी दो जिलों में बांटा गया है, जबकि चक्रधरपुर और गिरिडीह ग्रामीण को नए सांगठनिक जिलों के रूप में स्थापित किया गया है।
पार्टी ने जिलाध्यक्षों के चुनाव में सामाजिक संतुलन और महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया है। कुल 23 जिलाध्यक्षों में तीन महिलाएं शामिल हैं, जिनमें पाकुड़ से सरिता मुर्मू और चाईबासा से गीता बालमुचू प्रमुख हैं। इसके अलावा, चार जिलाध्यक्ष अनुसूचित जनजाति (ST) और एक अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से हैं, जबकि बाकी पदों पर पिछड़ा और सामान्य वर्ग के नेताओं को मौका दिया गया है। खास बात यह है कि आठ जिलाध्यक्षों को दोबारा निर्वाचित किया गया है, जो अनुभव और निरंतरता को दर्शाता है।





