Hindi News

झारखंड राज्यसभा चुनाव में परिमल नथवानी की एंट्री से सियासी हलचल तेज, दूसरी सीट पर बढ़ा रोमांच

Written by:Banshika Sharma
Published:
झारखंड राज्यसभा चुनाव में उद्योगपति परिमल नथवानी की संभावित एंट्री ने दूसरी सीट का मुकाबला बेहद दिलचस्प बना दिया है, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। ऐसे में इंडिया गठबंधन की एकजुटता कितनी मजबूत रहेगी, यह चुनाव का सबसे अहम सवाल बन गया है।

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। उद्योगपति और वर्तमान में आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी की चुनावी मैदान में संभावित एंट्री इसकी मुख्य वजह बन गई है। नथवानी के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद दूसरी सीट का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। झारखंड में राज्यसभा चुनाव का इतिहास हमेशा से क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं से जुड़ा रहा है। ऐसे में इंडिया गठबंधन की एकजुटता कितनी मजबूत रहेगी, यह चुनाव का सबसे अहम सवाल बन गया है।

दरअसल झामुमो ने अपने पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस ने राष्ट्रीय सचिव प्रणव झा को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर भाजपा नेता गौरव बल्लभ ने भी नामांकन पत्र खरीदा है। हालांकि भाजपा ने अब तक आधिकारिक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। परिमल नथवानी की संभावित एंट्री के बाद भाजपा का रुख और दूसरी सीट का पूरा समीकरण किस दिशा में जाएगा, इस पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।

भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की

दूसरी सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की है। इस बैठक को राज्यसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इंडिया गठबंधन किसी भी प्रकार की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए लगातार अंदरूनी बातचीत कर रहा है।

कौन हैं परिमल नथवानी ?

परिमल नथवानी का झारखंड की राजनीति से पुराना और गहरा रिश्ता रहा है। वह वर्ष 2008 और 2014 में झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। 2008 में जब उन्होंने पहली बार चुनाव जीता था, तब राज्य में मधु कोड़ा की सरकार थी। वहीं 2014 में उनकी जीत के दौरान हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री थे। राज्यसभा चुनाव के जटिल गणित और राजनीतिक प्रबंधन का उनका लंबा अनुभव इस बार भी उन्हें मजबूत दावेदार बना सकता है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाकर कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी के भीतर परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाए जाने की मांग उठ रही थी, लेकिन बैद्यनाथ राम के नाम पर सहमति बनाकर हेमंत सोरेन ने आंतरिक असंतोष को शांत करने के साथ-साथ दलित सामाजिक समीकरणों को भी साधने का प्रयास किया है।

झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें

संख्याबल की बात करें तो झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं। झामुमो के पास 34, कांग्रेस के पास 16, राजद के पास 4 और भाकपा माले के पास 2 विधायक हैं। इस तरह इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। वहीं भाजपा के पास 21, जदयू के पास 1, आजसू के पास 1 और लोजपा (रामविलास) के पास 1 विधायक सहित एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं। जेएलकेएम के जयराम कुमार महतो एकमात्र विधायक हैं।

राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को पहली वरीयता के 28 वोटों की आवश्यकता होती है। मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है। असली मुकाबला दूसरी सीट पर है, जहां परिमल नथवानी, कांग्रेस और भाजपा की रणनीति चुनाव को अप्रत्याशित मोड़ दे सकती है। अब सभी की निगाहें भाजपा के अगले कदम, परिमल नथवानी के अंतिम निर्णय और इंडिया गठबंधन के भीतर की एकजुटता पर टिकी हुई हैं। फिलहाल झारखंड की दूसरी राज्यसभा सीट राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा सस्पेंस बनी हुई है

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
Follow Us :GoogleNews