संगीत प्रेमियों के लिए खंडवा, आज किसी तीर्थ से कम नहीं था। भारतीय सिनेमा के अमर गायक, अभिनेता और हरफनमौला कलाकार किशोर कुमार की जन्म जयंती पर उनकी गृहनगरी पूरी तरह किशोरमय हो गई। सुबह से ही उनकी समाधि पर देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों प्रशंसकों का तांता लगा रहा। इन प्रशंसकों ने अपने प्रिय कलाकार को पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पूरे दिन समाधि परिसर में उनके सदाबहार गीतों की गूंज सुनाई देती रही, जो हर किसी को अपनी ओर खींच रही थी।
किशोर प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक केक काटकर जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर किशोर कुमार की सबसे प्रिय मानी जाने वाली दूध-जलेबी का भोग भी अर्पित किया गया। इसके बाद “रूप तेरा मस्ताना”, “मेरे सपनों की रानी”, “जिंदगी एक सफर है सुहाना” और “पल-पल दिल के पास” जैसे उनके कई लोकप्रिय गीत सामूहिक रूप से गाकर उन्हें याद किया गया। समाधि स्थल पर उपस्थित हर व्यक्ति अपने चहेते कलाकार को श्रद्धा और भावनाओं से स्मरण करता नजर आया।
पैतृक घर पहुंचकर भावुक हुए किशोर कुमार के प्रशंसक
जन्म जयंती के इस विशेष अवसर पर देशभर से आए प्रशंसकों ने बॉम्बे बाजार स्थित किशोर कुमार के पैतृक निवास का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने उनके बचपन से जुड़ी स्मृतियों को देखा और उन स्थानों को निहारा, जहां से एक साधारण बालक ने विश्वभर में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। कई प्रशंसकों ने उनके घर के बाहर तस्वीरें खिंचवाईं और उनकी यादों को अपने साथ संजोकर ले गए। यह उनके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव था।

समाधि स्थल पर गूंजे किशोर कुमार के सदाबहार गीत
समाधि स्थल पर दिनभर सांस्कृतिक और संगीतमय वातावरण बना रहा। अनेक कलाकारों एवं संगीत प्रेमियों ने मंच से किशोर कुमार के गीत प्रस्तुत किए, जिससे पूरा माहौल संगीतमय हो उठा। उनके अभिनय, गायन, निर्देशन, संगीत और हास्य कला के विभिन्न पहलुओं को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि किशोर कुमार केवल एक गायक नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की अमूल्य धरोहर हैं, जिनकी आवाज आज भी हर पीढ़ी के दिलों पर राज करती है। उनकी बहुमुखी प्रतिभा आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

जन्म जयंती पर खंडवा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
जन्म जयंती के अवसर पर शहर में विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं संगीत संस्थाओं द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। समाधि परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बनी रही। दूर-दराज़ से पहुंचे किशोर प्रेमियों ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि खंडवा आकर अपने प्रिय कलाकार की जन्मभूमि और कर्मभूमि को नमन करना उनके लिए किसी तीर्थ यात्रा से कम नहीं है। यह अनुभव उन्हें आत्मिक शांति प्रदान करता है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी किशोर कुमार की जन्म जयंती ने यह सिद्ध कर दिया कि समय भले ही बदल गया हो, लेकिन उनकी आवाज़, उनका अभिनय और उनकी अद्भुत कला आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जीवित है। खंडवा की मिट्टी से निकला यह सितारा आज भी पूरी दुनिया के संगीत प्रेमियों की धड़कनों में बसता है, और हमेशा बसता रहेगा।






